जनता दरबार में गरजे देवघर उपायुक्त, अतिक्रमण के मामलों में लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
नारंगी स्कूल की जमीन पर कब्जे की 48 घंटे में जांच, तुम्बाबेल आंगनवाड़ी सेविका चयन मामले की भी होगी पड़ताल
डीजे न्यूज, देवघर : सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे, राजस्व संबंधी शिकायतों और जनसमस्याओं के निष्पादन को लेकर देवघर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। मंगलवार को उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में आयोजित जनता दरबार में विभिन्न शिकायतों की सुनवाई हुई। उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अतिक्रमण से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई करें और शिकायतों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखें। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
जनता दरबार में जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने भू-अर्जन एवं मुआवजा भुगतान, झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, पेंशन, आवास और राजस्व से संबंधित समस्याएं रखीं। उपायुक्त ने फरियादियों की शिकायतें एक-एक कर सुनीं और संबंधित अधिकारियों को मामलों की जांच कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इस दौरान राशन कार्ड में नाम जोड़ने, मंईयां सम्मान योजना, पेंशन और राजस्व से जुड़े कुछ मामलों का संबंधित विभागों ने मौके पर ही निष्पादन किया।
स्कूल की जमीन से अतिक्रमण हटाने की पहल
सारवां प्रखंड के उत्क्रमित उच्च विद्यालय नारंगी की जमीन पर कथित अवैध अतिक्रमण का मामला जनता दरबार में उठाया गया। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने अनुमंडल पदाधिकारी, देवघर को 48 घंटे के भीतर जांच प्रतिवेदन समर्पित करने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। सरकारी विद्यालय की जमीन से संबंधित इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी।
आंगनवाड़ी सेविका चयन पर उठे सवाल
मोहनपुर प्रखंड के तुम्बाबेल आंगनवाड़ी केंद्र में सेविका चयन प्रक्रिया को गलत तरीके से खारिज किए जाने की शिकायत पर भी उपायुक्त ने संज्ञान लिया। उन्होंने उप विकास आयुक्त को मामले की जांच करने का निर्देश दिया। प्रशासन का कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्र का सुचारू संचालन और बच्चों के हित सुनिश्चित करने के लिए नियमानुसार योग्य उम्मीदवार के चयन की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाना जरूरी है।
अतिक्रमणकारियों पर होगी नियमानुसार कार्रवाई
उपायुक्त ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों और अंचलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण के मामलों को चिह्नित कर विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नोटिस और चेतावनी के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत अतिक्रमण हटाया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को आम जनता और विभिन्न संस्थाओं से प्राप्त शिकायतों एवं ज्ञापनों पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने तथा उनका समय पर निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिकायतों को लंबित रखने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जनता दरबार में दिए गए निर्देशों से प्रशासन ने सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने, राजस्व संबंधी विवादों के समाधान और जनशिकायतों के त्वरित निष्पादन पर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की है।