लाभुक चयन में गड़बड़ी हुई तो होगी कार्रवाई : देवघर उपायुक्त
डीजे न्यूज, देवघर: मत्स्य पालन, पशुपालन और गव्य विकास की योजनाओं में लाभुकों के चयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी या पारदर्शिता की कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। यह सख्त निर्देश उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया ने गुरुवार को समाहरणालय में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में दिया।
22 अक्टूबर को आयोजित इस बैठक में उपायुक्त ने मत्स्य, पशुपालन एवं गव्य विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन, पशुधन और दुग्ध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए योजनाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
**मत्स्य पालन योजनाओं में पारदर्शिता पर जोर**
मत्स्य विभाग की समीक्षा के दौरान वेद व्यास आवास योजना, विपणन योजना के तहत पिकअप वैन एवं विपणन किट वितरण, मत्स्य बीज उत्पादन एवं वितरण, सरकारी तालाबों की बंदोबस्ती और जीर्णोद्धार कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने लाभुकों के चयन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता बरतने और योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग इसका लाभ उठा सकें।
**पशुपालन और गव्य विकास योजनाओं की भी समीक्षा**
बैठक में सुकर विकास, बकरा विकास, कुक्कुट पालन और ब्रायलर कुक्कुट पालन सहित पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। वहीं, गव्य विकास विभाग के अंतर्गत दुधारू गाय योजना, डीप बोरिंग, वर्मी कंपोस्ट, पशु बीमा, चाफ कटर तथा पनीर एवं खोवा यूनिट स्थापना जैसी योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई। उपायुक्त ने इन योजनाओं में भी पात्र लाभुकों का चयन विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप करने पर जोर दिया।
**क्षेत्र भ्रमण कर योजनाओं की करें निगरानी**
उपायुक्त ने अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करने और योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत का जायजा लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विभागों को आवंटित लक्ष्यों का प्रखंड स्तर पर पंचायतों एवं जनसंख्या के आधार पर समान रूप से वितरण किया जाए, ताकि अधिकतम योग्य लाभुकों को योजनाओं से जोड़ा जा सके।
बैठक में पशुधन की मृत्यु दर और बीमा दावों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में पशुधन की मृत्यु दर काफी कम है और पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालकों को बीमा योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाता है।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही या अनियमितता किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया।
बैठक में उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, जिला मत्स्य पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, गव्य विकास पदाधिकारी, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।