शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर इंकलाबी नारों से गूंजा लोदना बाजार

शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर इंकलाबी नारों से गूंजा लोदना बाजार

डीजे न्यूज, तिसरा(धनबाद) : बिहार कोलियरी कामगार यूनियन के तत्वावधान में यमुना सहाय मेमोरियल सोसायटी स्मृति भवन लोदना के आंगन में शहीदे आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती पूर्ण मर्यादा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर यमुना सहाय मेमोरियल सोसायटी स्मृति भवन लोदना से लोदना बाजार में एक विशाल जुलूस निकाला गया।शहीद हम तुम्हें नहीं भूलेंगे, देश के सच्चे सपूत भगत सिंह की जयंती के अवसर पर आम जनता एक हो, आउटसोर्सिंग दलालों के खिलाफ आम जनता एक हो, महंगाई पर रोक लगाओ, इंकलाब के नारों में इंकलाब जिंदाबाद, आवाज दो हम एक हैं आदि गगनभेदी नारे लगाते हुए जुलूस यमुना सहाय मेमोरियल सोसायटी स्मृति भवन लोदना भगत सिंह शहीद स्थल पहुंच कर सभा में तब्दील हो गया जिसकी अध्यक्षता यूनियन के वरिष्ठ नेता यददु पासवान ने की और संचालन सुरेंद्र पासवान ने किया।सबसे पहले शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा पर माला पहनकर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद यूनियन के केंद्रीय उपाध्यक्ष सुरेश प्रसाद गुप्ता ने पुष्पांजलि चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। इसके साथ कार्यक्रम में उपस्थित तमाम साथियों ने बारी-बारी से शहीदे आजम भगत सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और नारा लगाया गया।इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह देश के सच्चे सपूत थे जिन्होंने देश, समाज और मानव कल्याण के लिए देश को गुलामी की जंजीरों से आजादी दिलाने के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमकर शहीद हो गए। वह एक महान क्रांतिकारी थे। उनका 28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा जिला में सरदार हरिकिशन सिंह और विद्यावती के यहां जन्म हुआ। उनका पूरा परिवार क्रांतिकारी था। उनके चाचा सरदार अजीत सिंह एक महान क्रांतिकारी थे। भगत सिंह भी बचपन से क्रांतिकारी परिवार और लोगों के बीच रहने के कारण वे और महान क्रांतिकारी बने जिन्होंने बड़े होकर अपने साथियों राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद आदि तमाम साथियों के साथ देश की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।उन्होंने साइमन कमीशन बिल के खिलाफ आंदोलन में शामिल हुए। इस आंदोलन में पुलिस लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय की हत्या होने के बाद पुलिस अधिकारी सांडर्स को गोली मार कर लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लिया। सन 1928 में, सन 1929 में अपनी बात हुकूमत तक पहुंचाने के लिए सेंट्रल असेंबली में बटुकेश्वर दत्त के साथ बम फेंक कर गिरफ्तारी दी। 23 मार्च सन 1931 को लाहौर जेल में शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फांसी दे दी गई। भगत सिंह आज हमारे बीच में नहीं हैं लेकिन उनके विचार आज भी हमारे बीच जिंदा हैं।भगत सिंह देश आजाद होने के बाद ऐसे समाज, देश का निर्माण करना चाहते थे जहां कोई भी युवा बेरोजगार न हो, सभी को रोजगार मिले, महिलाओं के साथ कोई भेदभाव न हो, उन्हें बराबरी से जीने का अधिकार मिले, महिला शोषण समाप्त हो, सभी बच्चों-छात्रों को समान शिक्षा प्राप्त हो, मजदूरों को समान काम का समान वेतन मिले, समाज के अंदर से छुआछूत जैसी कुप्रथा को समाप्त किया जाए, देश में भ्रष्टाचार मुक्त देश हो। लेकिन देखा जा रहा है कि आज उनके विचारों के विपरीत ही काम हो रहा है। इसके खिलाफ हम लोग संघर्ष कर रहे हैं और भगत सिंह के दिखाए गए रास्ते पर चलकर संघर्ष को तेज कर रहे हैं।वक्ताओं में यूनियन के केंद्रीय उपाध्यक्ष सुरेश प्रसाद गुप्ता, वरिष्ठ नेता यदु पासवान, क्षेत्रीय संयोजक सुरेंद्र पासवान, कुंदन पासवान शामिल थे। इस कार्यक्रम में उपस्थित मधुसूदन बैनर्जी, देवनंदन पासवान, भोला पासवान, अशोक बनर्जी, रामनरेश कुमार, जयद्रथ पासवान, रोशन खान, रेखा देवी, सुंदरवा देवी, संजू देवी, सोनिया देवी, मानो देवी, महेश पोद्दार, शिवजतन पासवान, समर सिंह, केदार राम, विनोद पासवान, सुरेश भुईया, राजेश बाउरी, जगदीश पासवान, दामोदर पासवान, संदीप कुमार, रोहित यादव आदि सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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