निजीकरण के खिलाफ रेलवे कर्मियों ने भरी हुंकार पुरानी पेंशन बहाली समेत कई मांगों को लेकर विशाल जन कन्वेंशन

निजीकरण के खिलाफ रेलवे कर्मियों ने भरी हुंकार

पुरानी पेंशन बहाली समेत कई मांगों को लेकर विशाल जन कन्वेंशन

डीजे न्यूज, धनबाद : ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के बैनर तले रविवार को धनबाद रेलवे ऑडिटोरियम में विशाल जन कन्वेंशन का आयोजन किया गया। कन्वेंशन में सैकड़ो मजदूरों ने भाग लिया। सभा की अध्यक्षता यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश कुमार ने की। संचालन शाखा सचिव विनोद कुमार ने किया। कन्वेंशन में रेलवे कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इस दौरान केंद्र सरकार की नीतियों पर चर्चा करते हुए रेलवे के निजीकरण और निगमीकरण का विरोध किया गया। साथ ही कर्मचारियों के हित में आठवें वेतन आयोग को लागू करने, सातवें वेतन आयोग के आधार पर बोनस देने तथा पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी एवं यूनियन से जुड़े पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि रेलवे देश की जीवनरेखा है और इसका निजीकरण किसी भी स्थिति में कर्मचारियों तथा आम जनता के हित में नहीं है। रेलवे को निजी हाथों में सौंपने से रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे और यात्रियों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
कन्वेंशन में रेलवे के निजीकरण एवं निगमीकरण के खिलाफ कर्मचारियों ने एकजुट होकर आवाज बुलंद की। वक्ताओं ने कहा कि रेलवे जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम को मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। रेलवे देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जरूरतों से सीधे जुड़ा हुआ है।

इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर भी विरोध जताया गया। यूनियन नेताओं ने लेबर कोड को रद्द करने की मांग की। उनका कहना था कि नए श्रम प्रावधानों से कर्मचारियों के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है। कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए श्रमिक संगठनों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

कन्वेंशन में आठवें वेतन आयोग को लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। कर्मचारियों का कहना था कि बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए वेतन एवं भत्तों में उचित वृद्धि आवश्यक है।

वक्ताओं ने कहा कि रेलवे कर्मचारी विषम परिस्थितियों में लगातार अपनी सेवाएं देते हैं। यात्री सुरक्षा, ट्रेन परिचालन, तकनीकी कार्य, स्टेशन संचालन और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाने वाले कर्मचारियों को उनकी मेहनत के अनुरूप वेतन एवं सुविधाएं मिलनी चाहिए।

कार्यक्रम में रेलवे कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के आधार पर बोनस देने की मांग भी उठाई गई। कर्मचारियों ने कहा कि बोनस कर्मचारियों के परिश्रम और योगदान के सम्मान का हिस्सा है। ऐसे में बोनस की गणना में वर्तमान वेतन संरचना को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

यूनियन नेताओं ने कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आगे भी आंदोलन को मजबूत करने की बात कही।

कन्वेंशन में नई पेंशन योजना और यूनिफाइड पेंशन स्कीम  को लेकर भी कर्मचारियों ने अपना विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों की प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना की बहाली रही।

वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलना जरूरी है। पुरानी पेंशन व्यवस्था को कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा से जोड़ते हुए इसे बहाल करने की मांग की गई। यूनियन ने सरकार से आग्रह किया कि कर्मचारियों की चिंताओं को देखते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए।

वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें केवल रेलवे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका संबंध देश की सार्वजनिक सेवाओं और श्रमिक वर्ग के भविष्य से भी है। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।

यूनियन की ओर से कहा गया कि यदि कर्मचारियों की जायज मांगों पर सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

कन्वेंशन में रेलवे के निजीकरण पर रोक, लेबर कोड रद्द करने, आठवें वेतन आयोग को लागू करने, सातवें वेतन आयोग के आधार पर बोनस देने तथा एनपीएस- यूपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद की। कार्यक्रम के अंत में कर्मचारियों ने एकजुटता बनाए रखने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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