बिना पांव की खिंचती दिव्यांग की जीवन रेखा
खुद सहित परिवार की जीवन रोटी चलाते सरदार सविंद्र की साहसी व्यक्तित्व
डीजे न्यूज, धनबाद : पांव से चलकर परिश्रम के जरिए पारिश्रमिक कमाना तो आम बात है, लेकिन सरदार सविंद्र की बात ही निराली है। शहर के धनसार क्षेत्र धनबाद, वार्ड नं.- 32 के निवासी दोनों पांव से दिव्यांग सरदार सविंद्र की पांव तो छीन गई, लेकिन हौसला कभी नहीं कमजोर पड़ी। उन्होंने लंबे समय से परिश्रम के जरिए न केवल स्वयं बल्कि अपनी परिवार जीवन रोटी चला रहे हैं। पांव की जगह हाथ के जरिए जीवन सवारते सरदार सविंद्र ने जीवन में अब तक कभी किसी से हाथ
नहीं फैलाएं।
इस दौरान उन्होंने खुद व परिवार के जीवन यापन के लिए रद्दी अखबार खरीदने व बेचने का धंधा किया, सब्जी बेचा तथा अन्य विभिन्न प्रकार के छोटे-छोटे कार्यों के जरिए खुद व परिवार का जीवन आर्थिक तंगी मे संवारा । इस दौरान कई मुसीबतें आई, लेकिन कभी जीवन से हार नहीं माना। धनबाद शहर की गली गली सरदार सविंद्र के कार्य शैली से परिचित है। उदारता में कई लोगों ने उनकी मदद भी की है। लेकिन वह मदद उनके जीवन में खुशहाली नहीं ला सकी।
धनबाद की शायद ही ऐसी कोई गली है जिसके लोग इनके परिश्रम की कहानी से परिचित न हो।
मौजूदा दौर में सरकार विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से जीवन संवारने के लिए सरकारी योजना का लाभ देती है। लेकिन ऐसा कोई सहयोग अब तक 61 वर्षीय सरदार सविंद्र को नसीब नहीं हो सकी है। ऐसे में अब पांव से लाचार सरदार सविंद्र ने धनबाद के उपायुक्त से मदद की गुहार लगाई है। अब देखना यह है की आर्थिक रूप से कमजोरों की मदद करने वाली राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ सरदार सविद्र कब उठा पाते है।
इस मामले में सरदार सविंद्र की मदद में सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच ने भी सहयोग की पहल की है। मंच के संस्थापक आचार्य संजय सिंह ” चंदन ” ने दिव्यांग स्व रोजगार हित में सरदार सविंद्र सिंह को ई- रिक्शा ” टोटो ” उपलब्ध कराने का माँग उपायुक्त धनबाद से की है। उन्होंने कहा कि आश्चर्य है धनबाद के जन प्रतिनिधियों को ऐसे उपेक्षित लोगों की सेवा में क्यों दिक्कत है ? करोड़ो रुपये के सरकारी फंड बिना खर्च के वापस हो जाते हैं ऐसे में दिव्यांग के रोजगार या स्व रोजगार पर वास्तविक सहयोग से आर्थिक रूप से कमजोर सरदार सविंद्र को काफी मदद मिलेगी खुद व परिवार को संभालने में।