रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ काला हीरा का समापन

रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ काला हीरा का समापन

डीजे न्यूज, धनबाद: सामुदायिक भवन सीसीडब्ल्यूओ में आयोजित दसवें ऑल इंडिया मल्टीलिंगुअल ड्रामा, डांस, ड्राइंग एंड म्यूजिक कंपटीशन फेस्टिवल काला हीरा का समापन मंगलवार को पुरस्कार वितरण के साथ हो गया। समापन समारोह की शुरुआत ऑल इंडिया थिएटर काउंसिल के संरक्षक , महासचिव व अन्य पदाधिकारियों व स्थानीय अतिथियों ने संयुक्त रूप से की। मुख्य अतिथि के रूप में धनबाद  मेयर संजीव सिंह को पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया ।वहीं समापन समारोह में क्रेडो वर्ल्ड स्कूल जूनियर ग्रुप, क्रैडेंजा म्यूजिक ग्रुप, बार्बी डांस एकेडमी सीनियर ग्रुप, शक्ति स्क्वायर जूनियर ग्रुप ने बहुत ही शानदार सोलो नृत्य की प्रस्तुति दी।साथ ही धनबाद के स्थानीय कलाकारों ने एक से बढ़कर एक नृत्य  गायन की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। इस चार दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में देशभर के कलाकार नाटक, नृत्य और गायन प्रस्तुत किया।अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने कहा महोत्सव का उद्देश्य स्थानीय और राष्ट्रीय कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करना है।
कार्यक्रम के चौथे और अंतिम दिन पहला नाटक गिरिडीह के अमन ग्रुप, रवि विज ग्रुप जमशेदपुर से अमितेश  का नाटक, गिरिडीह  कला संगम के नाटक,कला निकेतन के द्वारा दर्शकों के लिए विशेष प्रस्तुति सूर्यपुत्र कर्ण की दर्शनीय व शानदार प्रस्तुति हुई। आज दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत
श्मशान महापर्व नाटक काफी पसंद किया गया। इसमें कलाकारों द्वारा भावपूर्ण प्रस्तुति देकर  अविस्मरणीय भूमिका निभाई। इस नाटक में महाभारत युद्ध की उस करुण सच्चाई को प्रस्तुत किया गया। जहाँ धर्मयुद्ध के नाम पर असंख्य निर्दोष सैनिक मारे गए। यह नाटक युद्ध के बाद के दृश्य पर केंद्रित था, जब कुरुक्षेत्र के युद्ध से भरे हुए श्मशान में लगातार चिताएँ जल रही हैं।श्मशान में गिरे हुए वीरों के शरीर, विलाप करती स्त्रियाँ, और मौन में डूबा हुआ कुरुक्षेत्र यह प्रश्न उठाता है—क्या यह युद्ध वास्तव में धर्म का था? जिन सैनिकों ने केवल अपने राजा की आज्ञा मानी, वे बिना अपराध के मृत्यु को प्राप्त हुए।नाटक में श्मशान को महापर्व  कहा गया है क्योंकि यहीं युद्ध का असली परिणाम दिखाई देता है—न विजय का उत्सव, न पराजय का शोक, केवल मृत्यु की समानता। यहाँ पांडव और कौरव, विजेता और पराजित, सभी भेद समाप्त हो जाते हैं।श्मशान महापर्व सत्ता, युद्ध और अहंकार पर तीखा प्रहार करता है और यह संदेश देता है कि युद्ध की सबसे बड़ी कीमत निर्दोष मनुष्य चुकाते हैं। यह नाटक दर्शकों को करुणा, शांति और मानवता के मार्ग पर सोचने के लिए विवश करता है।
समापन समारोह में  मां धरती फाउंडेशन के रवि कुमार जिसे पद्म भूषण अवार्ड के लिए नॉमिनेशन किया गया है।उन्हें मंच पर मुंबई से आए डायरेक्टर अभिनेता तरुण बजाज ने अंग  वस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया । रवि निषाद ने बताया कि एक करोड़ पौधा लगाने का उनका अभियान जारी है अभी तक उन्होंने  तीन लाख सत्रह हज़ार पौधा विभिन्न धनबाद के विभिन्न स्थानों में लगा चुके हैं। उनका नारा है कि अधिक से अधिक पौधा रोपण करें और पौधारोपण के लिए सभी को प्रेरित करें। साथ ही ऑल इंडिया थियेटर काऊंसिल का स्थापना दिवस मनाया गया। इस मौके पर सभी ने एक स्वर से मांग उठाई की कलाकारों को रेल भाड़े में मिलने वाली रियायत पुनः चालू किया जाय।कला और कलाकारों की हित मे कार्य करने  वाला देश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक अनुष्ठान ऑल इंडिया थियेटर काऊंसिल ने अपना आठवां स्थापना दिवस बहुत उत्साह और  ज़ोश के साथ सीसीडब्ल्यूओ ऑडिटरियम में  मनाया। संगठन के अध्यक्ष मोहम्मद निज़ाम की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित संगठन के सभी साथी और अन्य कलाकारों ने संगठन का संगीत गाया। केक काटकर एक दूसरे को बधाई दी। संगठन बनाने में जिन लोगोका सक्रिय भागीदारी रही उन सभी को याद किया गया। उपस्थित ऑल इंडिया थियेटर काऊंसिल के सभी कार्यकर्त्ता और सदस्य ने  कोविड से पहले रेल भाड़े में कलाकारों को मिलने बाली रियायत को पुनः चालू करने केलिए अपनी मांग की। कार्यक्रम में उपस्थित ओड़िसा के वरिष्ठ रंगकर्मी राजगोपाल पाढ़ी ने कलाकारों को पेंशन, हर जिले में अच्छी ऑडिटरियम कलाकारों, को स्वल्प खर्च में मंच दिलाना आदि समस्या के ऊपर सरकार के सामने मांग रखे। स्थापना दिवस में राजस्थान से अशोक शर्मा, देशराज मिना, बिहार से आफताब राणा, काला हीरा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद,  सरसी चंद्रा, अस्टभुजा मिश्रा, सिबलाल सागर, वशिष्ठ प्रसाद सिन्हा, रबी नारायण बेहेरा, सीएच. देवदास, विशम्भर साहू कुल्टी के तनवीर आलम प्रमुख के साथ अनेक उपस्थित थे। स्थापना दिवस के अवसर  पर संगठन के अध्यक्ष मोहम्मद निज़ाम ने आने वाले दिनों में ऑल इंडिया थियेटर  देश भर में नाट्य कर्मशाला करने के साथ नाट्य महोत्सव कराने पर  विशेष जोर देकर सभी साथियो का धन्यवाद ज्ञापन किया। निर्णायक का मंडली में सिवान के फिल्म डायरेक्टर बिजय कुमार, मुंबई के फिल्म अभिनेता ए बी मिश्रा और पश्चिम बंगाल की अभिनेत्री मोनालिसा दास  थीं समापन समारोह में निर्णायक मंडली द्वारा सभी विजेता कलाकारों  व नाट्य मंचों को स्मृति चिन्ह मेडल व पुरस्कार देकर सम्मानित किया। चार दिवसीय काला हीरा कार्यक्रम  को सफल बनाने में काला हीरा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद, पूनम प्रसाद ,वैभव प्रसाद,मिताली मुखर्जी, सरसी चंद्रा,वशिष्ठ प्रसाद सिन्हा सचिव हेमंत कुमार मंडल, कोषाध्यक्ष नरेश राय, यू सी मिश्रा महेंद्र गिरी, शिवानी पंडित, दीक्षा , संजय भारद्वाज, संतोष रजक  राजेश सिंह का सक्रिय व महत्वपूर्ण योगदान था।

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