केंदुआ भू-धंसान क्षेत्र में क्षतिग्रस्त पेयजल पाइपलाइन होगी टैपिंग, 3-4 दिन में नई लाइन जोड़कर बहाल होगी जलापूर्ति 

केंदुआ भू-धंसान क्षेत्र में क्षतिग्रस्त पेयजल पाइपलाइन होगी टैपिंग, 3-4 दिन में नई लाइन जोड़कर बहाल होगी जलापूर्ति

डीजे न्यूज, केंदुआ (धनबाद): धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क स्थित केंदुआडीह पुराने जीएम बंगले के समीप हुए भू-धंसान और गैस रिसाव प्रभावित क्षेत्र के गोफ में झमाडा की क्षतिग्रस्त 12 इंच की पेयजलापूर्ति पाइपलाइन से लगातार पीने का पानी समा जाने की समस्या को लेकर झमाडा ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को कुसुंडा झमाडा के एसडीओ सचिन कुमार झा ने कर्मचारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान एसडीओ सचिन कुमार झा ने बताया कि पीने के पानी की हो रही बर्बादी को रोकने के लिए मंगलवार को केंदुआडीह थाना के पास क्षतिग्रस्त 12 इंच की पाइपलाइन की टैपिंग की जाएगी। इसके बाद प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कर युद्ध स्तर पर नई पाइपलाइन जोड़ने का कार्य शुरू होगा, ताकि प्रभावित इलाके के लोगों को जल्द से जल्द पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।

उन्होंने बताया कि नई पाइपलाइन जोड़ने और जलापूर्ति सामान्य करने में लगभग तीन से चार दिन का समय लगेगा। इस दौरान आम जनता से सहयोग करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि झमाडा पूरी गंभीरता से समस्या के समाधान में जुटा हुआ है।

एसडीओ सचिन कुमार झा ने कहा कि भू-धंसान स्थल के पास से गुजर रही दूसरी पेयजलापूर्ति पाइपलाइन को भी क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए उसे डायवर्ट करने अथवा वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि झमाडा की ओर से आम जनता को पीने के पानी की कोई परेशानी नहीं हो।

उन्होंने बताया कि इससे पहले झमाडा की ओर से क्षतिग्रस्त 12 इंच की पाइपलाइन से पुनः पेयजलापूर्ति शुरू कर स्थिति का आकलन किया गया था। लगभग एक घंटे तक पानी छोड़ा गया, लेकिन जांच में पाया गया कि पाइपलाइन से निकलने वाला पानी सीधे भू-धंसान स्थल के पास बने गोफ में समा रहा है। इसके बाद पानी की बर्बादी रोकने और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पाइपलाइन की टैपिंग कर नई लाइन बिछाने का निर्णय लिया गया।

झमाडा अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिकता इस बात की है कि भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था सुरक्षित रहे और मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद प्रभावित इलाकों के लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।

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