प्राथमिक शिक्षा में इन चार शिक्षकों की भूमिका को नहीं किया जा सकेगा नजरंदाज 

प्राथमिक शिक्षा में इन चार शिक्षकों की भूमिका को नहीं किया जा सकेगा नजरंदाज

प्राथमिक शिक्षा के चार स्तंभों कौशल सिंह, संजय कुमार, दिलीप कर्ण और अब राजकुमार वर्मा की गौरवशाली विदाई

डीजे न्यूज, धनबाद : धनबाद के प्राथमिक शिक्षा में चार सरकारी शिक्षकों की भूमिका को कोई नजरंदाज नहीं कर सकता है। ये चार शिक्षक हैं-कौशल सिंह, संजय कुमार, दिलीप कर्ण और अब राजकुमार वर्मा। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने का सवाल हो या फिर सामाजिक सरोकार का इनकी भूमिका बराबर याद रखी जाएगी। चुनाव संबंधी कार्यों में भी जिला प्रशासन इनकी सेवाएं बराबर लेता रहा है। इन चारों शिक्षकों में से कौशल सिंह, संजय कुमार और दिलीप कर्ण कुछ समय पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि चौथे शिक्षक राजकुमार वर्मा 30 जून काे सेवानिवृत हो गए। इसके ठीक एक दिन बाद एक जुलाई को राजकुमार वर्मा को उनके स्कूल राजकीयकृत मध्य विद्यालय दुर्गा मंदिर, नगरपालिका धनबाद में भव्य और भावपूर्ण विदाई दी गई। कई शिक्षक नेता और शिक्षक भी इस पल के गवाह बने थे।

इधर शिक्षक पुष्कर चंद्र झा ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से राजकुमार वर्मा के साथ-साथ कौशल सिंह, संजय कुमार और दिलीप कुमार कर्ण के बारे में अपने जो भाव व्यक्त किए वह निश्चित रूप से इनके लिए सबसे बड़ा उपहार हो सकता है। इस तरह के भाव अन्य कई शिक्षकों ने भी व्यक्त किए हैं।

आइये, हम आपको बताते हैं पुष्कर चंद्र झा ने इन चारों के बार में क्या भाव व्यक्त किए-

बीते दशक में भारतीय क्रिकेट ने एक ऐसा दौर देखा, जब क्रमशः राहुल द्रविड़, वी.वी.एस. लक्ष्मण, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली जैसे चार महान खिलाड़ियों ने संन्यास लिया। उनके जाने के साथ भारतीय क्रिकेट का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रही है।

आज धनबाद जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में भी कुछ वैसा ही क्षण प्रतीत होता है। पिछले कुछ वर्षों में क्रमशः कौशल कुमार सिंह, संजय कुमार, दिलीप कुमार कर्ण और अब राजकुमार वर्मा भी अपनी गौरवशाली शिक्षक-सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी दृष्टि में ये चारों धनबाद शिक्षा जगत के “फैब फोर” रहे हैं।

सबसे पहले बात कौशल कुमार सिंह की। वह राहुल द्रविड़ की याद दिलाते हैं। शांत, संयमित और परिणामोन्मुख नेतृत्व उनका परिचय रहा। मध्य विद्यालय नागनगर को उन्होंने नवाचार, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ऐसा मॉडल बनाया कि राज्य एवं भारत सरकार के अधिकारी भी उस विद्यालय का अवलोकन करने पहुंचते थे। उन्होंने सिद्ध किया कि एक विद्यालय का कायाकल्प दूरदर्शी नेतृत्व से संभव है।

संजय कुमार तो वीवीएस लक्ष्मण जैसे प्रतीत होते हैं। प्रभावशाली वक्ता, कुशल शिक्षक और शिक्षकों के हितों के सजग प्रतिनिधि। उन्होंने स्वयं भी अनेक शैक्षिक नवाचार किए और सैकड़ों शिक्षकों को प्रेरित किया। एक शिक्षक और संगठनात्मक नेतृत्वकर्ता के रूप में उनकी पहचान सदैव सम्मानित रही।

वहीं दिलीप कुमार कर्ण तो सचिन तेंदुलकर की तरह दिखाई देते हैं। शिक्षा हो, चुनाव जैसे प्रशासनिक दायित्व हों या तकनीकी नवाचार-उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदला। उनकी कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता और नवाचारों ने धनबाद में एक सक्षम टीम तैयार की। उनके कार्यों से अनेक शिक्षक प्रेरित हुए और उनकी सेवानिवृत्ति पर प्रकाशित स्मारिका भी उनके रचनात्मक व्यक्तित्व का प्रमाण है।

जहां तक राजकुमार वर्मा का सवाल है तो वह सौरव गांगुली की याद दिलाते हैं। वे केवल अच्छे शिक्षक ही नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व रहे जिन्होंने विद्यालयों के उत्कृष्ट कार्यों को समाज और मीडिया तक पहुंचाने का अभियान चलाया। गरीब एवं वंचित बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने, विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा शिक्षा में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

इन चारों शिक्षकों ने अलग-अलग शैली में कार्य किया, लेकिन उनका लक्ष्य एक ही रहा-सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य।

आज वे सेवा से भले ही निवृत्त हो गए हों, किंतु धनबाद की शिक्षा व्यवस्था में उनका योगदान सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। आने वाली पीढ़ियां उनके अनुभव, कार्यशैली और समर्पण से सीखती रहेंगी।

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