झरिया में भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया संकल्प

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झरिया में भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया संकल्प
डीजे न्यूज, तिसरा,
धनबाद : जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी एवं आदिवासी जननायक भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि झरिया विधानसभा क्षेत्र में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।
डिगवाडीह स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता मदन राम के कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दो मिनट का मौन रखकर की गई।
उपस्थित लोगों ने बिरसा मुंडा के संघर्ष, बलिदान और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए उनके द्वारा छेड़े गए आंदोलन को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत और जमींदारों के शोषण के खिलाफ बिरसा मुंडा ने जो उलगुलान खड़ा किया, वह आज भी दलित, शोषित और आदिवासी समाज को अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देता है।
सभा को संबोधित करते हुए झामुमो नेता मदन राम ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि वे आदिवासी समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान के प्रतीक थे। उन्होंने जल, जंगल, जमीन को आदिवासियों का मूल अधिकार बताया और कहा कि आज भी इस अधिकार की रक्षा के लिए हम सबको एकजुट होना होगा। उनके विचार और संघर्ष आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके जमाने में थे।
कार्यक्रम में मौजूद अन्य वक्ताओं आशीष सिंह, वीरेंद्र सिंह कुशवाहा, अनवर अंसारी, जितेंद्र पासवान और मगही-भोजपुरी केंद्रीय अध्यक्ष ननकू यादव ने भी बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में फैली कुरीतियों, अशिक्षा और शोषण को समाप्त करने का आह्वान किया।
मौके पर बोलाई सिंह, इम्तियाज अंसारी, शकीला बानो, प्रमोद महतो, बादशाह खान, हरिप्रसाद सहेब और शेख गौतम हरि ने कहा कि बिरसा मुंडा का नारा ‘अबुआ दिशोम अबुआ राज’ आज भी आदिवासी स्वशासन की मांग का प्रतीक है।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलने और उनके बताए मार्ग पर जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे बिरसा मुंडा के इतिहास को पढ़ें और समाज सेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

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