त्याग, करुणा, सेवा और अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है बकरीद
बलिदान का पर्व बकरीद सलमानों का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार पैगंबर हजरत इब्राहिम द्वारा अल्लाह के प्रति अपनी अटूट आस्था और समर्पण के प्रतीक के रूप में उनकी कुर्बानी की तत्परता की याद में मनाया जाता है। यह त्योहार त्याग, करुणा, सेवा और अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। मुसलमानों का विश्वास है कि अल्लाह ने इब्राहिम की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी। इब्राहिम ने अपने जवान बेटे इस्माइल को अल्लाह की राह में क़ुर्बान करने का फैसला कर लिया। लेकिन वो जैसे ही अपने बेटे को कुर्बान करने वाले थे अल्लाह ने उनकी जगह एक दुंबे को रख दिया। अल्लाह केवल उनकी परीक्षा ले रहे थे। दुनिया भर में मुसलमान इसी परंपरा को याद करते हुए बकरीद यानि ईद-उल-अजहा मनाते हैं। इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार किसी जानवर की कुर्बानी दी जाती है। दुनिया के लाखों मुसलमान हर साल पवित्र शहर मक्का जाते हैं। बकरे की कुर्बानी हज का एक अहम हिस्सा है।
यह त्योहार वार्षिक हज यात्रा की समाप्ति के बाद मनाया जाता है। बृहस्पति को टुंडी के सभी ईदगाहों में अहले सुबह बकरीद की नमाज अदा की जाएगी। इसके बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार लोग कुर्बानी करेंगे।
शहजाद अंसारी, टुंडी