परियोजना प्रभावित क्षेत्र के वंचित छात्रों को दिया गया प्रशिक्षण

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परियोजना प्रभावित क्षेत्र के वंचित छात्रों को दिया गया प्रशिक्षण

डीजे न्यूज, धनबाद: कोयला कंपनी बीसीसीएल के प्रोजेक्ट अफेक्टेड पर्सन्स (PAP) और वंचित वर्ग के बच्चों के बीच साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आइआइटी-आइएसएम  धनबाद ने शनिवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय झरिया में एक दिवसीय आउटरीच एवं मोटिवेशन प्रोग्राम आयोजित किया। इस दौरान करीब 250 छात्रों और शिक्षकों को हैंड्स-ऑन एक्सपेरिमेंट्स के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें विजुअल, लॉजिकल और एक्सपेरिमेंटल अप्रोच का समन्वय किया गया, ताकि वैज्ञानिक सोच विकसित हो, जिज्ञासा बढ़े और रोजमर्रा के जीवन से जुड़े विज्ञान के सिद्धांतों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

कार्यक्रम का नेतृत्व संस्थान के प्रो. रश्मि सिंह (प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर) और प्रो. नीलाद्रि दास (प्रोग्राम को-कोऑर्डिनेटर), डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग द्वारा किया गया। इस मौके पर बीसीसीएल के निदेशक (एचआर)  मुरली कृष्ण रमैय्या, महाप्रबंधक (सीएसआर) सुरेंद्र भूषण, सीएसआर टीम के प्रमुख कुमार मनोज तथा सीएसआर मैनेजर अभिजीत मित्रा भी उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण की मुख्य विशेषता इसकी अभिनव शिक्षण पद्धति रही, जिसमें बैलून ब्लो-अप, कैंडल वॉटर राइजिंग, टरमरिक इंडिकेटर, एलीफेंट टूथपेस्ट और लावा लैंप जैसे सरल लेकिन प्रभावी प्रयोगों के जरिए गैस निर्माण, वायुदाब, रासायनिक अभिक्रिया, pH परिवर्तन, घनत्व और द्रव गतिकी जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझाया गया। इन प्रयोगों ने छात्रों को थ्योरी को वास्तविक जीवन से जोड़ने में मदद की।

प्रो. रश्मि सिंह ने कहा, “जब छात्र खुद देखकर, सोचकर और प्रयोग करके सीखते हैं, तब विज्ञान की समझ और भी मजबूत होती है।” वहीं प्रो. नीलाद्रि दास ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ उन्हें भविष्य में STEM क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

विद्यालय की प्राचार्या सुनीता शॉ ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रैक्टिकल सेशन छात्रों की रुचि और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाते हैं।

यह कार्यक्रम संस्थान और बीसीसीएल के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा है। इससे पहले नावागढ़ स्थित डीपीएलएमए हाई स्कूल में भी इसी तरह का प्रशिक्षण आयोजित किया जा चुका है। आने वाले दिनों में क्षेत्र के अन्य स्कूलों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को इसका लाभ मिल सके।

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