मन, भावना और कर्म के बीच सामंजस का नाम योग है: स्वामी निरंजानानंद
डीजे न्यूज, धनबाद: आनंद योग धारा धनबाद द्वारा आध्यात्म मे प्रवेश स्वयं को जानो भारत योग यात्रा धनबाद की शुरुआत शुक्रवार शाम आईआईटी आईएसएम के पेनमैन हाल में सत्संग के साथ समारोहपूर्वक हुई। इस दौरान बिहार योग विद्यालय, विश्व योगपीठ मुंगेर के परमाचार्य स्वामी निरंजानानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि योग विचार, वाणी और कर्म के बीच समन्वय और सामंजस स्थापित करता है । दूसरे शब्दों में मन, भावना और कर्म के बीच सामंजस का नाम योग है। योग विद्या भारतवर्ष की सबसे प्राचीन संस्कृति और जीवन पद्धति है और इसी के बल पर भारतवासी प्राचीन काल में सुखी, समृद्ध और स्वस्थ जीवन बिताते थे । जब से भारत में योग विद्या का ह्रास हुआ है, तभी से भारतवासी गरीब, दुखी और अस्वस्थ हैं। पूजा पाठ, धर्म कर्म से शांति मिलती है और योगाभ्यास से धन-धान्य, समृद्धि और स्वास्थ्य। भारत में सुख- समृद्धि, शक्ति और स्वास्थ्य के लिए हर व्यक्ति को योगाभ्यास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका एवं यूरोपीय देशों में रोगमुक्त जीवन पाने के लिए योग को चिकित्सा के साथ जोड़ा गया है । विदेश में भी लोग योग पर जोर दे रहे हैं । उन्होंने कहा कि योग वर्तमान की सर्वाधिक मूल्यवान विरासत है या वर्तमान युग की अनिवार्य आवश्यकता और आने वाले युग की संस्कृति है । योग सम्यक जीवन का विज्ञान है । अतः इसका समावेश हमारे दैनिक जीवन में एक नियत चार्य के रूप में होनी चाहिए । यह हमारे व्यक्तित्व के शारीरिक, प्राणिक, मानसिक भावनात्मक , अतींद्रिय और आध्यात्मिक सभी पहलुओं को प्रभावित करता है । उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि आईआईटी आईएसएम की हीरक जयंती पर वह यहां पहुंचे थे और अब शताब्दी वर्ष पर उन्हें यहां आने का मौका मिला है इसके पूर्व आईआईटी आईएसएम के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्र ने स्वागत संबोधन में कहा कि संस्थान परिसर को खुशी है कि शताब्दी वर्ष में योग विद्या के युग पुरुष का आगमन यहां हुआ है स्वामी जी, निदेशक एवं उपनिदेशक प्रो धीरज कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
कार्यक्रम
शनिवार एवं रविवार को सुबह 7:00 से सुबह 9:00 तक योगाभ्यास सत्र आईआईटी आईएसएम के जिमखाना ग्राउंड में होगा । दोनों दिन शाम 5:00 बजे से 7:00 तक सत्संग सत्र पेनमैन हाल में होगा ।