लेनिन दिवस: माकपा ने दी महान क्रांतिकारी प्रणेता को श्रद्धांजलि
डीजे न्यूज, रांची: समाजवादी क्रांति के महान नायक और आधुनिक विश्व इतिहास की दिशा बदलने वाले *कॉ. लेनिन* की 156वीं जयंती के अवसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने पूरे झारखंड में ‘लेनिन दिवस’ का आयोजन किया। राज्य कार्यालय सहित विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने लेनिन के सिद्धांतों और उनकी क्रांतिकारी विरासत को याद किया।
मजदूरों-किसानों का राज और लेनिन का योगदान
राज्य कार्यालय में आयोजित मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पार्टी के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि कॉ. लेनिन ने साम्राज्यवादी युद्ध के दौर में जिस रणनीतिक और कार्यनीतिक दिशा का निर्धारण किया, उसी का परिणाम रूस की महान समाजवादी क्रांति के रूप में सामने आया। इतिहास में पहली बार किसी देश में सत्ता की बागडोर सीधे तौर पर मजदूरों और किसानों के हाथों में आई।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया:
जहाँ जर्मनी, फ्रांस और इंग्लैंड के ‘सोशल डेमोक्रेट्स’ (सामाजिक जनवादी) अपनी साम्राज्यवादी हुकूमतों के साथ समझौता कर रहे थे, वहीं लेनिन के नेतृत्व में रूस ने एक वैकल्पिक मार्ग दिखाया।
यूरोपीय ताकतों के इसी अवसरवाद ने दूसरे साम्राज्यवादी युद्ध की नींव रखी।
लेनिन ने ‘साम्राज्यवाद को पूंजीवाद की अंतिम अवस्था’ के रूप में परिभाषित कर मार्क्सवाद को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया और 20वीं सदी को क्रांतिकारी परिवर्तनों की सदी बना दिया।
वैश्विक क्रांति और नाजीवाद के खिलाफ संघर्ष
प्रकाश विप्लव ने रेखांकित किया कि 20वीं सदी न केवल चीन, वियतनाम, क्यूबा और उत्तर कोरिया में समाजवादी क्रांतियों के लिए जानी जाती है, बल्कि दुनिया भर के राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों की सफलता का भी इतिहास है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज यदि दुनिया में लोकतंत्र बचा है और नाजीवाद का खात्मा हुआ है, तो इसमें कम्युनिस्टों की सर्वोपरि भूमिका रही है।
समकालीन चुनौतियाँ और लेनिन की प्रासंगिकता
राज्य सचिवमंडल सदस्य समीर दास ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि 90 के दशक से साम्राज्यवादी ताकतों के नेतृत्व में ‘प्रतिक्रांति’ का दौर शुरू हुआ है। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में लेनिन की शिक्षाएं आज भी दुनिया के शोषित वर्गों के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह हैं।
अध्यक्षता अमल आजाद ने की।
प्रफुल्ल लिंडा और सुधांशु शेखर ने भी लेनिन के विचारों पर प्रकाश डाला। प्रतीक मिश्र ने लेनिन के जीवन और संघर्ष पर आधारित दो प्रभावशाली कविताओं का पाठ किया।
कार्यक्रम में प्रकाश टोप्पो (शहर सचिव), वीना लिंडा, के. पी. राय, विरेन्द्र कुमार, किशोर चक्रवर्ती, अनिर्बाण बोस, नवीन चौधरी, अमर उरांव, महेश मुंडा, अमन सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे।