



आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में हेरिटेज नेटवर्क जनरल असेंबली की भव्य शुरुआत, भारत-यूरोप शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा

डीजे न्यूज, धनबाद:
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में हेरिटेज नेटवर्क एनुअल जनरल असेंबली का विधिवत शुभारंभ सोमवार को टेक्समिन हॉल, i2H बिल्डिंग में हुआ। चार दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन 1 से 4 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन आईआईटी (आईएसएम) के डीन (इंटरनेशनल रिलेशंस एंड एलुमनाई अफेयर्स) कार्यालय द्वारा मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहयोग से किया जा रहा है। इस जनरल असेंबली में भारत और यूरोप के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, संस्थान प्रमुख और नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत डीन (आईआरएए) प्रो. राजीव उपाध्याय के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि आईआईटी (आईएसएम) वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बाद आयोजन के संयोजक और एसोसिएट डीन (आईआरएए) प्रो. तन्मय मैती ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह मंच भारत-यूरोप के बीच दीर्घकालिक और परिणामोन्मुखी साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर है। उद्घाटन सत्र का संचालन प्रो. रजनी सिंह, डीन कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस ने किया। उन्होंने हेरिटेज नेटवर्क की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंच संस्थानों के बीच विश्वास, अकादमिक आदान-प्रदान और संयुक्त शोध को नई मजबूती देता है।
हेरिटेज नेटवर्क की अध्यक्ष प्रो. टेरेसा ज़िलिंस्का ने इसे नेटवर्क के लिए मील का पत्थर वर्ष बताया। उन्होंने आईआईटी (आईएसएम) प्रबंधन और आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सतत विकास, डिजिटल परिवर्तन और समावेशी शिक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर साझा प्रयास समय की मांग है। नेटवर्क के उपाध्यक्ष प्रो. विमल चंद्र श्रीवास्तव ने भारत-यूरोप सहयोग की बढ़ती संभावनाओं पर बल देते हुए बहु-संस्थागत साझेदारी की आवश्यकता बताई। उन्होंने विनिर्माण, जलवायु परिवर्तन और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संयुक्त प्रस्तावों और वित्तीय अवसरों का उल्लेख किया।
आईआईटी (आईएसएम) के उपनिदेशक प्रो. धीरज कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि संस्थान के शताब्दी वर्ष में इस तरह का आयोजन ऐतिहासिक महत्व रखता है। उन्होंने ज्ञान हस्तांतरण से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त मास्टर्स कार्यक्रमों पर जोर दिया। मुख्य वक्ता ग्वेनेल गिलर्मे ने टी.आई.एम.ई. एसोसिएशन और डबल डिग्री कार्यक्रमों पर प्रकाश डालते हुए वैश्विक शैक्षणिक गतिशीलता की बढ़ती जरूरत को रेखांकित किया।
अंत में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष एवं सह-संयोजक प्रो. सोमनाथ चट्टोपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन समिति में प्रो. तन्मय मैती (संयोजक), प्रो. आलोक दास और प्रो. सोमनाथ चट्टोपाध्याय (सह-संयोजक), प्रो. सौरभ दत्ता गुप्ता, प्रो. शिबायन सरकार, आशीष कुमार और मृत्युंजय शर्मा शामिल हैं ।
पहले दिन थीमैटिक कॉन्फ्रेंस और कार्यशालाओं का आयोजन हुआ, जिनमें सतत विकास, समावेशी शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा की गई। अगले दो दिनों में नेटवर्क के भविष्य की रूपरेखा, प्रबंधन संबंधी निर्णय, पोस्टर प्रेजेंटेशन, द्विपक्षीय बैठकें, कैंपस भ्रमण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन भारत और यूरोप के बीच शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




