



गिरिडीह के ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन को बचाने की मुहिम तेज, रेलवे मंत्रालय से कार्रवाई की मांग : सुनील खंडेलवाल

डीजे न्यूज, गिरिडीह : गिरिडीह शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन की उपेक्षा को लेकर जनआक्रोश लगातार बढ़ रहा है। सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने इस मुद्दे पर Railway Board, भारत सरकार के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत को Ministry of Railways को प्रेषित करते हुए Eastern Railway, कोलकाता के उपमहाप्रबंधक (जी) श्री शिवराम माझी को भी अग्रसारित किया गया है।
शिकायत पत्र में कहा गया है कि लगभग 150 वर्ष पुराना गिरिडीह रेलवे स्टेशन शहर की ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ-साथ लाखों नागरिकों की जीवनरेखा रहा है। इसके बावजूद वर्षों से इसके विकास, आधुनिकीकरण एवं नियमित ट्रेन संचालन की अनदेखी की जा रही है। दूसरी ओर, नया स्टेशन शहर से दूर स्थापित होने के कारण आम जनता को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों को न्यू गिरिडीह स्टेशन तक पहुंचने के लिए लगभग ₹150 तक ऑटो/टोटो किराया देना पड़ता है, जबकि गिरिडीह से मधुपुर (38 किमी) का रेल किराया मात्र ₹10 है। इसे सामाजिक एवं आर्थिक असमानता का उदाहरण बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की गई है।
पत्र में प्रमुख मांगें इस प्रकार रखी गई हैं—
पुराने स्टेशन का शीघ्र सर्वेक्षण कर जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण की कार्ययोजना घोषित की जाए।
कोलकाता, पटना सहित प्रमुख शहरों के लिए यात्री ट्रेनों का संचालन पुनः प्रारंभ किया जाए।
प्लेटफार्म, प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, प्रकाश एवं सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाए।
स्थानीय जनता एवं जनप्रतिनिधियों से परामर्श कर पारदर्शी निर्णय लिया जाए।
सुनील खंडेलवाल ने कहा कि यह मुद्दा केवल रेल सुविधा का नहीं, बल्कि गिरिडीह की ऐतिहासिक अस्मिता, आर्थिक गतिविधियों और आम नागरिकों की दैनिक आवश्यकताओं से जुड़ा है। यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो लोकतांत्रिक एवं वैधानिक माध्यमों से व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
रेलवे प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि वह जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस मामले में त्वरित और सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे।




