14 हजार फीट की ऊंचाई पर 78 मिनट उड़ा ‘विजय जेड-1’, आईआईटी-आईएसएम के पूर्व छात्र की तकनीक ने दिखाया दम

14 हजार फीट की ऊंचाई पर 78 मिनट उड़ा ‘विजय जेड-1’, आईआईटी-आईएसएम के पूर्व छात्र की तकनीक ने दिखाया दम

डीजे न्यूज, धनबाद : आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के पूर्व छात्र सौरव सिंह और उनके को-फाउंडर ने स्वदेशी ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनके स्टार्टअप जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित ‘विजय जेड-1’ ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल के दौरान 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1 घंटे 18 मिनट 26 सेकेंड तक उड़ान भरकर अपनी क्षमता साबित की।

भारतीय सेना ने इस ऊंचाई पर लगातार 45 मिनट की उड़ान का लक्ष्य निर्धारित किया था। ड्रोन ने निर्धारित समय से काफी अधिक उड़ान भरते हुए परीक्षण में बेहतर प्रदर्शन किया। 3 और 4 अगस्त 2026 को भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड ने अरुणाचल प्रदेश के हाई-एल्टीट्यूड बेस कैंप और सेला टॉप के ऊपर इसका परीक्षण किया। बारिश और कोहरे जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ड्रोन ने सफलतापूर्वक उड़ान पूरी की।

सौरव सिंह आईआईटी (आईएसएम) के 2020 बैच के छात्र रहे हैं और उन्होंने 2022 में माइनिंग इंजीनियरिंग में एमटेक पूरा किया। वर्ष 2025 में उन्होंने जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स की शुरुआत की। यह स्टार्टअप आईआईटी (आईएसएम) के सेंटर ऑफ इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआईआईई) में इनक्यूबेटेड है।

‘विजय जेड-1’ हाई-एंड्योरेंस और ऑल-वेदर क्वाडकॉप्टर है। इसे विशेष रूप से कठिन मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों में निगरानी समेत विभिन्न कार्यों के लिए विकसित किया गया है। जून 2026 में तैयार इसके छठे और नवीनतम संस्करण में 85 फीसदी से अधिक स्वदेशी कंटेंट है। इसका कार्बन-फाइबर फ्रेम भी कंपनी की टीम ने स्वयं डिजाइन और विकसित किया

ड्रोन ने सामान्य ऊंचाई पर 2 घंटे 22 मिनट, 12 हजार फीट पर 1 घंटे 20 मिनट 33 सेकेंड और 14 हजार फीट पर 1 घंटे 18 मिनट 26 सेकेंड की उड़ान क्षमता प्रदर्शित की है। इसकी ऑपरेशनल ऊंचाई 4200 मीटर, रेंज 40 किलोमीटर और पेलोड क्षमता 500 ग्राम है, जिसे 1.2 किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है। करीब 2.7 किलोग्राम वजन वाला यह ड्रोन पूरी तरह इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित है।

कंपनी के अनुसार, ड्रोन के विकास के दौरान अब तक 1000 घंटे से अधिक ग्राउंड टेस्टिंग और क्रैश टेस्टिंग की जा चुकी है। अगस्त 2025 में काम शुरू होने के बाद टीम ने पांच प्रोटोटाइप तैयार किए, जबकि छठा संस्करण फाइनल वर्जन के रूप में विकसित किया गया है।

सेना के परीक्षण के बाद कंपनी को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और ड्रोन को शामिल करने में रुचि दिखाई गई है। सितंबर 2026 में ‘विजय जेड-1’ का प्रोक्योरमेंट-लेवल वैलिडेशन टेस्टिंग चरण चल रहा है।

सौरव सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत उन तकनीकों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकता, जो देश की संप्रभुता और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी हैं। डिफेंस टेक्नोलॉजी इस विजन को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आईआईटी (आईएसएम) के डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक दास ने कहा कि ‘विजय जेड-1’ इस बात का उदाहरण है कि संस्थान के पूर्व छात्रों के आइडिया किस तरह उपयोगी तकनीक में बदल सकते हैं। यह आईआईटी (आईएसएम) के इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम की क्षमता को भी दर्शाता है।

फिलहाल जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप है और इसकी हर महीने करीब 90 ड्रोन बनाने की क्षमता है। कंपनी ड्रोन की दूसरी सीरीज और हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम पर भी काम कर रही है। इसके अलावा 50 मिनट से अधिक फ्लाइट टाइम वाला कॉम्पैक्ट ट्रेनिंग ड्रोन भी कमर्शियलाइजेशन के लिए तैयार किया जा रहा है।

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