वीबी ग्राम (जी) अधिनियम को निरस्त करने की मांग को हड़ताल पर गए मनरेगा श्रमिक
मजदूर-किसान संगठनों ने किया समर्थन
डीजे न्यूज, रांची: वीबी ग्राम (जी) अधिनियम को निरस्त करने की मांग को लेकर मनरेगा मजदूरों ने शुक्रवार को कार्यस्थलों पर ऐतिहासिक राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। इस आंदोलन का कृषि और ग्रामीण मजदूर यूनियनों के संयुक्त मंच और नरेगा संघर्ष मोर्चा ने समर्थन किया गया है। ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच और संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही इस हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन और एकजुटता देने की घोषणा कर दी थी। आज की यह हड़ताल 12 फरवरी को आयोजित अखिल भारतीय आम हड़ताल के दौरान उठाई गई मांगों को लेकर चल रहे तेज़ होते संघर्ष के क्रम में था। संयुक्त मंच ने भारत की एकमात्र कानूनी रूप से गारंटीकृत रोजगार योजना को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने की कड़ी निंदा की और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण रोजगार गारंटी सुनिश्चित करना है, जिसके तहत चार बुनियादी मांगें उठाई गई हैं। इन मांगों के तहत, पहले वीबी ग्राम (जी) अधिनियम को तुरंत निरस्त कर एक कानूनी रूप से मजबूत मनरेगा ढांचे को बहाल किया जाए, क्योंकि यह अधिनियम न केवल राज्य सरकार पर 40% तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है, बल्कि संघवाद के सिद्धांतों के भी विरुद्ध है। दूसरी मांग, आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर परिवार को सालाना कम से कम 200 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाए और महंगाई सूचकांक के आधार पर वर्ष में दो बार संशोधित होने वाली ₹700 की न्यूनतम दैनिक मजदूरी लागू की जाए। तीसरी मांग डिजिटल हाजिरी, आधार लिंक्ड भुगतान और विशेष रूप से हाल ही में लागू की गई चेहरा पहचानने वाली (फेसियल रिकग्निशन) उपस्थिति प्रणाली जैसी मजदूर विरोधी तकनीकों पर तुरंत रोक लगाई जाए, क्योंकि इन तकनीकी खामियों ने लाखों गरीब श्रमिकों को उनकी वैध मजदूरी से मनमाने ढंग से वंचित कर दिया है। चौथी मांग के तहत, स्थानीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिए ग्राम सभाओं को मनरेगा कार्यों के नियोजन, क्रियान्वयन और सोशल ऑडिट की मुख्य जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें पूरी तरह सशक्त बनाया जाए।
इस अवसर पर, झारखंड खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, झारखंड राज्य किसान सभा और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स की राज्य कमेटियों ने मेहनतकश जनता और के समाज के सभी लोकतांत्रिक के तबकों से अपील की है कि वे ग्रामीण आबादी के हाशिए पर मौजूद वर्ग के रोजगार की गारंटी के मुद्दे पर चल रहे लगातार संघर्ष के साथ दृढ़ता से खड़े हों। उन्होंने केंद्र सरकार अमीर विरोधी नीतियों को वापस लेने पर मजबूर करने के लिए एक निर्णायक संयुक्त संघर्ष की तैयारी का एलान-समर्थक व जन-किया।
मौके पर अखिल भारतीय किसान सभा के कॉ पी कृष्णा प्रसाद, अवधेश कुमार, झारखण्ड खेत एंव ग्रामीण मजदूर यूनियन के विरेन्द्र कुमार , किसान नेता सुरजीत सिन्हा, रीता स्वासी, उमेश महतो, असीम सरकार, सुफल महतो, प्रफुल्ल लिण्डा , मधुआ कच्छप, प्रदीप गुडिया, अशोक साह, सप्वन महतो, शंकर उरांव, विश्वजीत देव आदि थे।