सरकार ने आवास दिया होता तो नहीं जाती सर्पदंश से भाई-बहन की मौत : ज्ञान रंजन 

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सरकार ने आवास दिया होता तो नहीं जाती सर्पदंश से भाई-बहन की मौत : ज्ञान रंजन

 

घर पर सिर्फ एक खटिया थी जिस पर दोनों शवों को ले जाया गया श्मशान 

 

न मिला आवास और न ही मृतक बच्चों की मां को मिलता है सरकारी अनाज 

टुंडी(धनबाद) : पूर्वी टुंडी प्रखंड के उकमा पंचायत अंतर्गत कोरईया गांव में शनिवार की रात सोने के क्रम में विषैला सांप के काटने से दो मासूम भाई-बहन की मौत हो गई थी। ग्रामीणों एवं प्रशासन के समझाने बुझाने पर दोनों शवों का पोस्टमार्टम हुआ और आपदा विभाग से मुआवजा देने की पहल हुई। सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यसमिति सदस्य ज्ञान रंजन सिन्हा पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। सोमवार को पूर्वी टुंडी के अंचलाधिकारी भी वहां पहुंचे थे। उन्होंने कुछ राशन एवं अन्य खाद्य सामग्री देकर अपनी जिम्मेवारी का निर्वाहन किया। भाजपा नेता ज्ञान रंजन सिन्हा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा है कि प्रश्न उठता है कि किस परिस्थिति में बच्चे जमीन पर सोये थे जबकि गर्मी के मौसम में सांप अपने बिल से बाहर आ जाता है। ये बात गांव वाले अच्छी तरह से जानते हैं। लेकिन परिस्थिति सब कुछ करा देता है। आज मैने मृतक बच्चों के घर जाकर देखा। मृतक बच्चों की मां अपने तीन बच्चों के साथ घर में सोई थी। घर में सिर्फ एक छोटा खटिया था वो भी मृतक के बॉडी को लेकर श्मशान घाट भेजना पड़ा। बड़ा बेटा खटिया मैं सोया था जो सर्पदंश से बच गया। जमीन पर सोये दोनों बच्चों को सांप ने अपना शिकार बना लिया। ज्ञान रंजन सिन्हा ने बताया कि मृतक बच्चों की मां को सरकारी राशन नहीं मिलता है क्योंकि परिवार के राशन कार्ड में उसका नाम नहीं है। उस परिवार को आज तक सरकारी आवास नहीं मिला है। यदि पीएम आवास या अबुआ आवास उस परिवार को मिला रहता तो दोनों बच्चे सर्प दंश से नहीं मरते। कारण, सांप पक्का फ्लोर में चल नहीं पाता है। बच्चों के पिता को यहां रोजगार नहीं मिल पाने के कारण तमिलनाडु रोजगार के लिए दो माह पूर्व जाना पड़ा। ज्ञान रंजन सिन्हा ने कहा कि वह इस घटना के लिए पूर्ण रूप से सरकार और उसके पदाधिकारी को जिम्मेवार मानते हैं।

उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि

एक सप्ताह के भीतर आपदा विभाग के मुआवजा राशि का भुगतान किया जाय।

इस परिवार को विशेष परिस्थिति में अबुवा आवास या प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराया जाय।

राशन कार्ड में इस परिवार का भी नाम जोड़ा जाय और राशन उपलब्ध कराया जाय।

उस टोला के अधूरे पड़े प्रधानमंत्री आवास का अगला किस्त उपलब्ध कराया जाय।

विशेष अभियान के तहत उस टोले के छूटे हुए लोगों को प्रधानमंत्री आवास दिया जाए।

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