साइबर ठगी से बचाव को अब गांव-गांव पहुंचेगा जागरूकता अभियान रात्रि चौपाल से लेकर संचार मित्र तक का किया जाएगा आयोजन फर्जी सिम बेचने वालों पर भी पुलिस की नजर

साइबर ठगी से बचाव को अब गांव-गांव पहुंचेगा जागरूकता अभियान

रात्रि चौपाल से लेकर संचार मित्र तक का किया जाएगा आयोजन

फर्जी सिम बेचने वालों पर भी पुलिस की नजर

डीजे न्यूज, धनबाद: साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए धनबाद पुलिस अब बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चला रही है। लक्ष्य है जिले की करीब 25 लाख आबादी को साइबर अपराधियों के नए-नए हथकंडों से सतर्क करना। इसके लिए शहर से लेकर गांव तक पुलिस की टीमें पहुंच रही हैं। स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं, तो गांवों में अब रात्रि चौपाल के जरिए लोगों को साइबर ठगी से बचने के तरीके बताए जाएंगे। धनबाद पुलिस साइबर अपराधियों के साथ-साथ कथित तौर पर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर भी नजर रख रही है।

धनबाद के डीएसपी विधि-व्यवस्था कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने साइबर सेफ्टी अवेयरनेस वीक और पुलिस की भावी रणनीति की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 17 अगस्त से शुरू किए गए जागरूकता अभियान का उद्देश्य धनबाद की करीब 25 लाख आबादी को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करना है।

पुलिस की टीमें स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचकर लोगों को फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी फ्रॉड, फर्जी लिंक और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों से बचने के तरीके बता रही हैं।

अभियान को सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। अब ग्रामीण इलाकों में रात्रि चौपाल लगाकर पुलिस सीधे लोगों से संवाद करेगी।

इसके साथ ही जागरूकता पुस्तिकाओं का वितरण, ऑडियो-वीडियो वैन के जरिए प्रचार और शॉपिंग मॉल समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष वीडियो सेशन भी आयोजित किए जा रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि साइबर सुरक्षा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी से चलने वाली मुहिम है। लोग खुद सतर्क रहें और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूक करें।

साइबर जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए दूरसंचार विभाग और धनबाद पुलिस ने मिलकर संचार मित्र कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसके तहत आईआईटी (आइएसएम) के 13 युवाओं को संचार मित्र बनाया गया है। इन युवाओं को पुलिस और दूरसंचार विभाग की ओर से 24 घंटे की विशेष ओरिएंटेशन ट्रेनिंग दी गई है।

ये संचार मित्र लोगों को साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने के साथ-साथ संदिग्ध मोबाइल नंबर और संचार सेवाओं की जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर 1930, चक्षु पोर्टल और संचार साथी पोर्टल के उपयोग की जानकारी देंगे।

उन्होंने बताया कि इससे पहले पोषण सखी और आंगनवाड़ी सेविकाओं को भी साइबर सुरक्षा के जमीनी नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है।

साइबर अपराधियों के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए धनबाद पुलिस अब उन्हें संसाधन उपलब्ध कराने वालों पर भी कार्रवाई कर रही है।

ग्रामीण एसपी के मुताबिक, डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म की मदद से ऐसे दुकानों और स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां कथित तौर पर फर्जी या अवैध दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी किए जा रहे हैं।

इनपुट और डेटा के विश्लेषण के बाद संबंधित ठिकानों पर छापेमारी और कार्रवाई की जा रही है।

वहीं धनबाद की सीमा से सटे जामताड़ा, गिरिडीह और देवघर के इलाकों को साइबर अपराध के लिहाज से संवेदनशील मानते हुए विशेष निगरानी बढ़ाई गई है।

इन इलाकों में भी चौपाल और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही साइबर अपराध की राह पर जाने वाले युवाओं को पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि वे समय रहते इस रास्ते से दूर हो जाएं, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

साइबर जागरूकता अभियान को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद धनबाद पुलिस ने इसे केवल एक सप्ताह तक सीमित नहीं रखने का फैसला किया है। अब हर सप्ताह एक से दो बार स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध पर केवल कार्रवाई से पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि आम लोग ठगी के तरीकों को पहचानें, सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।

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