राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ आशा लकड़ा ने की 20 जनजातीय मामलों की सुनवाई
गोड्डा और देवघर के मामलों की सुनवाई के दौरान जमीन से संबंधित तीन मामले निपटाए
डीजे न्यूज, दुमका : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने मंगलवार को दूसरे दिन दुमका में गोड्डा और देवघर जिले के लगभग 20 जनजातीय मामलों की सुनवाई की।
उन्होंने बताया कि दानपत्र में मिले जमीन से संबंधित तीन मामलों का निष्पादन किया गया। इसी प्रकार, पेंशन से संबंधित एक और जमीन की घेराबन्दी से संबंधित एक मामले को भी सुनवाई के दौरान निष्पादित किया गया। इसके अलावा अन्य मामलों में संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन को आगे की कार्रवाई करने और आयोग को संबंधित रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग आदिवासी समुदाय के लोगों के विकास और उनके अधिकारों के लिए आयोग की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। आदिवासी समाज के विकास के लिए उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन को कई आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
मुत्वपूर्ण मामले
* 1. गोड्डा जिले के झिलुआ पंचायत निवासी गौतम माल पहाड़िया ने आयोग के समक्ष शिकायत किया था कि अब तक उनका राशन कार्ड नहीं बन पाया है, जिसके कारण उन्हें सरकार की ओर से उप्लब्धज कराई जाने वाली खाद्य सामग्री और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)के तहत मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। उन्होंने यह भी बताया था कि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति अत्यंत साधारण है। इसलिए उनकी परिस्थितियों को देखते हुए उनके नाम से नया राशन कार्ड जल्द से जल्द निर्गत कराने की आवश्यक कार्रवाई कराई जाए।
* 2. गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड निवासी व जिला परिषद सदस्य चुंडा मरांडी ने आयोग के समक्ष शिकायत किया था कि पोड़ैयाहाट प्रखंड के आदिवासी बहुल गावों के विकास के लिए कल्याण विभाग की ओर से विभिन्न योजनाएं स्वीकृत कराई जाए। उन्होंने सलैया पंचायत स्थित जगवाडीह गांव की मुख्य सड़क को जोड़ने के लिए सड़क निर्माण, अमूवार संथाली पंचायत स्थित मांझी तोला अमूवार से द्रौप मुख्य मार्ग तक PCC सड़क निर्माण, बड़ा राजदाहा गांव को मुख्य बाजार से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण, गुणघासा मिल तोला को मुख्य बाजार से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण, चतरा पंचायत स्थित कसियाजोर आदिवासी टोला को बांझी सड़क से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण, धेनुकत्ता पंचायत स्थित बेलटुप्पा मुख्य सड़क से हरला आदिवासी टोला होते हुए पहाड़िया टोला तक पक्की सड़क निर्माण, सलैया पंचायत स्थित कमराडोल गांव में सोलर जलमीनार निर्माण, सलैया पंचायत स्थित सिझुवा गांव में सांस्कृतिक भवन निर्माण, सलैया पंचायत स्थित दक्षिण बहियार गांव में सांस्कृतिक भवन निर्माण, असुवार संथाली पंचायत स्थित गुणघासा नीचे टोला में सोलर जलमीनार निर्माण, असुवार संथाली पंचायत स्थित गुणघासा मोहली टोला में सोलर जलमीनार निर्माण, असुवार संथाली पंचायत स्थित बड़ा राजदाहा गांव में सोलर जलमीनार निर्माण और धेनुकट्टा पंचायत स्थित झापनिबान्ध मुखिया टोला में सोलर जलमीनार निर्माण कराने का अनुरोध किया था।
* 3. गोड्डा जिले के बोआरीजोर प्रखंड निवासी प्रमोद हेम्ब्रम ने आयोग के समक्ष शिकायत किया था कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड राजमहल परियोजना, ललमटिया की ओर से आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों के हनन, विस्थापन और पुनर्वास में गंभीर अनियमितता की गई है। संबंधित क्षेत्र में वर्ष 1981 से ईस्टर्न कोल्फील्डस लिमिटेड की ओर से कोयला खनन कार्य किया जा रहा है, जिसके कारण बड़ा सिमरा, बड़ा भोडाय, नीमा कला, बसडीहा, लोहड़िया समेत कई आदिवासी राजस्व गांव पूर्णतः या आंशिक रूप से विस्थापित हो चुके हैं। यह पूरा क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आता है। विस्थापित समुदायों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लगभग 30 वर्षों के बाद भी पुनर्वास स्थलों पर उन्हें भूमि का कोई वैध स्वामित्व, बंदोबस्ती या पंजीकरण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस कारण आज भी विस्थापित आदिवासी परिवार अपने पुराने भूमि अभिलेखों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। भूमि के वैध दस्तावेज न होने के कारण उन्हें जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड समेत अन्य सरकारी दस्तावेज प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमोद हेम्ब्रम की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि ECL यह दावा करती है कि अधिगृहित भूमि अब उसकी स्थायी संपत्ति बन चुकी है और मूल आदिवासी रैयतों के उस पर कोई अधिकार नहीं रह गया है। साथ ही पिछले पांच वर्षों से प्रशासन की ओर से विस्थापित लोगों से भूमि लगान भी स्वीकार नहीं किया जा रहा है, जिससे उनकी पारंपरिक भूमि अधिकारों को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। अधिगृहित आदिवासी भूमि पर गैर-आदिवासी समुदायों को बसाया जा रहा है, जो अनुज़ूचित क्षेत्रों में आदिवासी भूमि संरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और नीतियों के विपरीत है। यदि यह स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में विस्थापित आदिवासी समुदाय अपना स्थायी निवासी पहचान, जातीय प्रमाणिकता और भूमि स्वामित्व साबित करने में असमर्थ हो जाएगा। अपनी ही पैतृक भूमि में भूमिहीन और अधिकार विहीन हो जाएंगे।
* 4. गोड्डा जिले के झिलुवा ग्राम निवासी दुर्गा माल पहाड़िन ने आयोग के समक्ष शिकायत की थी कि उन्हें पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। पेंशन स्वीकृति और नियमित रूप से लागू कराने के लिए उन्होंने आयोग से आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। इसके बाद उन्होंने अपने गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए पानी की टंकी अथवा समुचित जल सुविधा उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया था।
* 5. गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड स्थित लाठीबाड़ी गांव निवासी रोजमेरी मुर्मू ने आयोग के समक्ष शिकायत की थी। उन्होंने आवेदन के माध्यम से कहा था कि रघुनाथपुर मौजा स्थित उनके पति की पैतृक भूमि पर गैर-आदिवासी व्यक्तियों ने कब्जा कर मकान समेत अन्य निर्माण कर लिया है। उनके पति साइमन मरांडी ने अनुमंडल पदाधिकारी, गोड्डा की अदालत में वाद दायर किया था। इस मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय की ओर से संताल परगना काश्तकारी अधिनियम के तहत गैर-आदिवासी कब्जाधारी को अतिक्रमणकारी मानते हुए बेदखली का आदेश पारित किया था। साथ ही अंचलाधिकारी को भूमि खाली कराकर आवेदक को वास्तविक कब्जा दिलाने का निर्देश दिया था। हालांकि न्यायालय के आदेश के बाद भी आज तक आवेदिका को उनकी भूमि पर कब्जा वापस नहीं दिलाया गया।इसलिए आवेदक की ओर से आयोग से उचित हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया, ताकि उन्हें उनकी भूमि का वास्तविक कब्जा पुनः प्राप्त हो सके।