रंगो के कैनवास पर साकार हुई मां दुर्गा के आगमन की छटा, 20 छात्रों ने दिखाई प्रतिभा
अनुवा अकादमी के ‘शरोदिया आगोमोनी’ कला शिविर में भारतीय संस्कृति और शारदीय परंपरा की दिखी झलक
डीजे न्यूज, धनबाद : मां दुर्गा के शारदीय आगमन की खुशी और बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा मंगलवार को धनबाद के बैंक मोड़ स्थित अनुवा अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स के एक दिवसीय कला शिविर ‘शरोदिया आगोमोनी’ में रंगों के माध्यम से जीवंत हो उठी। शिविर में अकादमी के 20 छात्र-छात्राओं ने अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उकेरते हुए मां दुर्गा के आगमन, शरद ऋतु की सुंदरता और पारंपरिक उत्सव के विविध दृश्यों को कलाकृतियों में ढाला।
कला शिविर का उद्देश्य बच्चों को चित्रकला के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपरा और दुर्गापूजा के महत्व से जोड़ना था। बंगाल की संस्कृति में ‘आगोमोनी’ मां दुर्गा के मायके आगमन की खुशी का प्रतीक है। इसी भाव को केंद्र में रखकर आयोजित शिविर में बच्चों ने भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक विरासत को रंगों के जरिए अभिव्यक्त किया।
**विभिन्न रंगों और तकनीकों से उकेरी सांस्कृतिक छटा**
शिविर में कक्षा एक के बच्चों से लेकर ओपन टू ऑल वर्ग के प्रतिभागियों तक ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। वॉटर कलर, एक्रेलिक, ऑयल पेस्टल और पेंसिल कलर जैसे विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल कर कुल 20 कलाकृतियां तैयार की गईं। किसी चित्र में शरद ऋतु का नीला आकाश और सफेद काश फूल नजर आए, तो किसी में मां दुर्गा के तेजस्वी स्वरूप को उकेरा गया। कई चित्रों में ढाक की थाप, शंखनाद, ग्रामीण बंगाल का परिवेश और मां के स्वागत में जुटे लोगों की खुशियां दिखाई दीं।
कलाकृतियों में मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा के साथ प्रकृति की सुंदरता और लोक परंपराओं की झलक भी देखने को मिली। बच्चों ने रंगों और कल्पनाशीलता के जरिए अपनी कलात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।
**संस्कृति से जोड़ना भी कला शिक्षा का उद्देश्य : अनुवा घोष**
अकादमी की अध्यक्ष अनुवा घोष ने कहा कि ‘शरोदिया आगोमोनी’ केवल कला शिविर नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति, कला और संस्कृति का संगम है। आधुनिक दौर में बच्चों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है। बच्चों ने अपनी कल्पनाओं और रंगों के माध्यम से मां दुर्गा के आगमन को जिस सुंदरता से प्रस्तुत किया है, वह सराहनीय है। अकादमी का प्रयास केवल चित्रकला सिखाना नहीं, बल्कि बच्चों को संवेदनशील और संस्कृति के प्रति जागरूक बनाना भी है।
अकादमी के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. विक्टर घोष ने कहा कि कला बच्चों की सोच को आकार देने और उनकी छिपी प्रतिभा को सामने लाने का सशक्त माध्यम है। विभिन्न रंगों और तकनीकों के इस्तेमाल से बच्चों ने अपनी भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि धनबाद के बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने के साथ व्यापक मंच मिल सके।
**छात्रों ने साझा किए अपने अनुभव**
कक्षा सात की छात्रा स्नेहा कुमारी ने एक्रेलिक रंगों से मां दुर्गा का चेहरा बनाया और उनकी आंखों में करुणा दर्शाने का प्रयास किया। कक्षा नौ के आर्यन दत्ता ने वॉटर कलर से गांव में मां दुर्गा के आगमन का दृश्य उकेरा। वहीं, ओपन टू ऑल वर्ग की अनुष्का घोष ने ऑयल पेस्टल के माध्यम से काश फूलों के बीच शारदीय उत्सव की छटा प्रस्तुत की। विद्यार्थियों ने कहा कि शिविर में उन्हें नई तकनीक सीखने और अपनी कल्पनाओं को स्वतंत्र रूप से चित्रों में उतारने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के समापन पर सभी 20 कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई। अभिभावकों और कला प्रेमियों ने बच्चों की रचनाओं की सराहना की। सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अनुवा अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स धनबाद में गुणवत्तापूर्ण कला शिक्षा के लिए आईएसओ 9001:2015 प्रमाणन प्राप्त संस्था है, जो बच्चों को कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है।