नगर भवन में आदिवासी संस्कृति का दिखा रंग, महोत्सव में लोकनृत्य और लोकधुनों ने मोहा मन
डीजे न्यूज, गिरिडीह : नगर भवन, गिरिडीह में रविवार को झारखंड आदिवासी महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव का उद्देश्य जिले की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपरा, लोककला, भाषा, जीवन-पद्धति और गौरवशाली इतिहास के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ जनजातीय प्रतिभाओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी पारंपरिक रीति-रिवाज ‘लोटा-पानी’ के साथ अतिथियों के स्वागत से हुई। इसके बाद भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। महापौर, उप महापौर, पुलिस अधीक्षक, वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी सहित जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया।
जनजातीय विरासत हमारी पहचान और गौरव : उपायुक्त
उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि झारखंड आदिवासी महोत्सव जनजातीय संस्कृति, परंपरा, लोककला, भाषा और जीवन-पद्धति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हो, चांद-भैरव, नीलांबर-पीतांबर, फूलो-झानो, पोटो हो और तिलका मांझी जैसे महानायकों की वीरगाथाओं की साक्षी रही है।
उन्होंने कहा कि टाना भगत आंदोलन से लेकर झारखंड आंदोलन तक आदिवासी समाज ने संघर्ष, सामाजिक जागरूकता और अपने अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन महान विभूतियों के संघर्ष और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
संस्कृति के साथ विकास पर भी प्रशासन का जोर
उपायुक्त ने कहा कि महोत्सव के माध्यम से जनजातीय नृत्य-संगीत, पारंपरिक वेशभूषा, कला एवं हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन, पुस्तक प्रदर्शनी और विभिन्न सरकारी योजनाओं को एक मंच पर लाया गया है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि जनजातीय विरासत के संरक्षण के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण और रोजगार के अवसरों को भी मजबूत किया जाए।
उन्होंने कहा कि पात्र लाभुकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।
मांदर की थाप पर थिरके कलाकार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
उद्घाटन समारोह में एकलव्य विद्यालय पालगंज, अनुसूचित जनजाति आवासीय विद्यालय पीरटांड़, शिक्षा विभाग और जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक आदिवासी नृत्य एवं संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। स्थानीय कलाकारों ने मांदर और नगाड़े की थाप पर लोकनृत्य प्रस्तुत कर जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों को जीवंत कर दिया।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, पहचान तथा जल-जंगल-जमीन की विरासत को लेकर जागरूकता का संदेश भी दिया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल प्रतिभागियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
छात्र-छात्राओं के बीच साइकिल वितरण, जागरूकता वाहन को हरी झंडी
महोत्सव के दौरान कल्याण विभाग की ओर से पात्र छात्र-छात्राओं एवं लाभुकों के बीच साइकिल का वितरण किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के आवागमन को आसान बनाकर उनकी शिक्षा को जारी रखने में सहयोग देना है।
वहीं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के जागरूकता वाहन को अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं जनहितकारी संदेशों का प्रचार-प्रसार करेगा।
हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को मिला मंच
महोत्सव परिसर में विभिन्न विभागों और संस्थाओं की ओर से थीम आधारित स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें स्थानीय हस्तशिल्प, हस्तकरघा, पारंपरिक उत्पाद, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, आजीविका और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की जा रही है।
उपायुक्त ने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और जनजातीय प्रतिभाओं को पहचान के साथ बाजार भी उपलब्ध होगा। उन्होंने जिलेवासियों को झारखंड आदिवासी महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग के लिए सभी जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, कलाकारों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के प्रति आभार जताया।