मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति में देरी पर सिविल सोसाइटी मुखर, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति में देरी पर सिविल सोसाइटी मुखर, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

डीजे न्यूज, गिरिडीह : झारखंड राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिक्त रहने और बड़ी संख्या में लंबित द्वितीय अपीलों एवं शिकायतों की सुनवाई में हो रही देरी को लेकर सिविल सोसाइटी गिरिडीह ने गंभीर चिंता जताई है। संस्था ने इस संबंध में राज्यपाल को पत्र भेजकर आयोग की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।

सिविल सोसाइटी के महासचिव शंकर पांडेय ने कहा कि राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति एवं पदस्थापन के बावजूद मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिक्त रहने से आयोग का कामकाज अपेक्षित रूप से संचालित नहीं हो पा रहा है। इसके कारण बड़ी संख्या में द्वितीय अपील एवं शिकायत वाद लंबित हैं और इनके निस्तारण में लगातार देरी हो रही है।

संस्था का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ प्रभावी अपीलीय उपचार का अधिकार देता है। यदि द्वितीय अपीलों और शिकायतों की सुनवाई समय पर नहीं होती है, तो सूचना का अधिकार व्यवहारिक रूप से प्रभावित होता है। विशेष रूप से भ्रष्टाचार, अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ी सूचनाओं के मामलों में समय पर अपीलीय सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण है।

राजकोष पर खर्च, फिर भी लंबित मामले चिंता का विषय

सिविल सोसाइटी ने आयोग के प्रशासनिक खर्च का भी मुद्दा उठाया है। संस्था के अनुसार सूचना आयुक्तों एवं कर्मचारियों के वेतन, कार्यालय, वाहन समेत अन्य मदों में राज्य के राजकोष से प्रतिमाह लाखों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में यदि नागरिकों की अपीलों और शिकायतों का समय पर निस्तारण नहीं हो रहा है, तो यह प्रशासनिक दक्षता और सार्वजनिक धन के समुचित उपयोग की दृष्टि से भी गंभीर विषय है।

संस्था ने पत्र में 27 दिसंबर 2019 की उस प्रशासनिक व्यवस्था का भी उल्लेख किया है, जब झारखंड सरकार ने एक राज्य सूचना आयुक्त को कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त का प्रभार दिया था। सिविल सोसाइटी ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में भी विधि-सम्मत अंतरिम व्यवस्था पर तत्काल विचार किया जाना चाहिए, ताकि आयोग का कामकाज बाधित न हो।

राज्यपाल से दो प्रमुख मांगें

सिविल सोसाइटी ने राज्यपाल से मुख्य सूचना आयुक्त की नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से जल्द पूरा कराने तथा लंबित द्वितीय अपीलों एवं शिकायत वादों की शीघ्र सुनवाई और निस्तारण के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।

साथ ही संस्था ने कहा है कि नियमित नियुक्ति होने तक आयोग के प्रभावी संचालन के लिए विधि-सम्मत अंतरिम व्यवस्था की जाए। सिविल सोसाइटी के पदाधिकारियों ने कहा कि सूचना का अधिकार पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन की आधारशिला है। राज्य सूचना आयोग इस अधिकार की रक्षा करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है, इसलिए नेतृत्व के अभाव में मामलों का लंबित रहना जनहित और लोकतांत्रिक जवाबदेही के अनुरूप नहीं है।

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Scroll to Top