एमएमडीआर संशोधन कानून के खिलाफ बाघमारा में झामुमो ने किया प्रदर्शन संसद में बिना बहस कानून पारित कराना लोकतंत्र का हनन: रतिलाल

एमएमडीआर संशोधन कानून के खिलाफ बाघमारा में झामुमो ने किया प्रदर्शन

संसद में बिना बहस कानून पारित कराना लोकतंत्र का हनन: रतिलाल

डीजे न्यूज, कतरास(धनबाद): केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एमएमडीआर  संशोधन कानून के विरोध में शनिवार को झामुमो ने बाघमारा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में प्रदर्शन कर धरना दिया। अध्यक्षता प्रखण्ड अध्यक्ष धीरेन रवानी ने की। संचालन सचिव मनसा राम मुर्मू ने किया।
झामुमो के वरीय नेता रतिलाल टुडू ने केंद्र की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर लोकसभा और राज्यसभा में बिना किसी सार्थक बहस के इस काले संशोधन कानून को पारित कराया है। यह सीधे तौर पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संघीय ढांचे की हत्या है। अब समय आ गया है झारखण्ड के तमाम भाजपा समर्पित सांसदों का बहिष्कार करना होगा एवं उनका पुतला भी फूँका जायेगा।
श्री टुडू ने संशोधन की बारीकियों को उजागर करते हुए कहा कि इस कानून की धारा 9D के माध्यम से खनिज उत्पादक राज्यों के टैक्स और सेस (कर व उपकर) के संवैधानिक अधिकारों पर डाका डाला गया है। केंद्र सरकार गैर-भाजपा शासित और विशेषकर खनिज बहुल राज्यों के वित्तीय स्रोतों को छीनकर उन्हें आर्थिक रूप से पंगु बनाना चाहती है। झारखंड के हक और अधिकार की यह लूट किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
केंद्र सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए रतिलाल टुडू ने कहा कि यदि इस जनविरोधी व राज्यविरोधी संशोधन को तत्काल वापस नहीं लिया गया, तो पूरे झारखंड में व्यापक आर्थिक नाकाबंदी की जाएगी। झारखंड की धरती से निकलने वाले कोयला, लोहा सहित किसी भी खनिज संपदा को राज्य की सीमा से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। राज्य की जनता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेगी।
प्रदर्शन में झामुमो के केंद्रीय नेता डबलू महथा,नकुल महतो, जिला संगठन सचिव मनोज रवानी, रंजीत महतो, युवा जिला अध्यक्ष सूरज महतो, रिज़वान क्रांतिकारी, बिरजू सोरेन, रामजीत टुडू, घल्टु त्रिगुणायत, अर्जुन मुखिया, संजय रजवार, पंकज दिनकर, रौनक सिन्हा, सहजाद अंसारी, वकील अंसारी आज़ाद मुखिया विशाल बाल्मीकि, सुधांशु पांडेय, रितेश अग्रवाल, शिव प्रसाद महतो, सागर भुईयां, पारस ठाकुर, सोनू कुमार, मन्नू चौहान अजीत चौहान के अलावा ग्रामीण, खदान मजदूर,  रैयत, कोलियरी विस्थापित, खनन प्रभावित परिवार और किसान शामिल हुए।

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