बच्चों ने जाना अधिकार और कर्त्तव्य का महत्व
डीजे न्यूज, धनबाद: सेंट ज़ेवियर इंटरनेशनल स्कूल नवाडीह में विद्यार्थियों के बीच पारिवारिक, सामाजिक, पर्यावरण एवं नागरिक चेतना विकसित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आयोजकों ने युवा छात्र-छात्राओं के साथ कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्त्तव्य जैसे विषयों पर सकारात्मक एवं संवादात्मक चर्चा की। कार्यक्रम का प्रमुख संदेश रहा कि एक जिम्मेदार नागरिक के लिए अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण अपने परिवार, समाज, पर्यावरण और राष्ट्र के प्रति कर्त्तव्यों को समझना और उनका पालन करना भी है।
कार्यक्रम में वर्तमान तकनीकी युग में तेजी से बढ़ते स्क्रीन टाइम और मोबाइल के अनावश्यक उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। विद्यार्थियों के साथ इस विषय पर विचार किया गया कि मोबाइल फोन और तकनीक हमारे जीवन को सुविधाजनक बनाने के महत्वपूर्ण साधन हैं, लेकिन अनावश्यक रील्स, फिल्में, गेम्स और अन्य डिजिटल सामग्री में अत्यधिक समय व्यतीत करना हमारे पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। कई बार एक ही घर और एक ही छत के नीचे रहने के बावजूद परिवार के सदस्य मोबाइल स्क्रीन में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उनके बीच प्रत्यक्ष संवाद और साथ बिताया जाने वाला समय कम होता जाता है।
विद्यार्थियों को परिवार के सदस्यों के साथ नियमित संवाद करने, बुजुर्गों के अनुभवों से सीखने और पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए प्रेरित किया गया। विशेष रूप से परिवार के साथ बैठकर रात्रिभोजन करने को आपसी संवाद और आत्मीयता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। युवाओं से अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी एवं परिवार के अन्य बुजुर्गों से अपने पूर्वजों, पारिवारिक इतिहास, परंपराओं और उनके जीवन-संघर्षों के बारे में जानने का आग्रह भी किया गया।
कार्यक्रम में सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जिम्मेदार उपयोग पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को भ्रामक, भड़काऊ अथवा समाज में विभाजन पैदा करने वाली सामग्री के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया। चर्चा में इस बात पर भी ध्यान आकर्षित किया गया कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर कुछ तत्व जाति, भाषा, क्षेत्र अथवा अन्य आधारों पर समाज में आपसी मतभेद और वैमनस्य पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में युवाओं के लिए किसी भी जानकारी पर प्रतिक्रिया देने अथवा उसे आगे साझा करने से पहले उसकी सत्यता को समझना और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यावरण संरक्षण को समर्पित रहा। विद्यार्थियों ने प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग, अनावश्यक कंक्रीटीकरण और आवश्यकता से अधिक वाहनों के प्रयोग से पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझा। तालाबों, नदियों, वनों, वन्यजीवों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन एवं उन्हें जाने-अनजाने नुकसान पहुंचाने से भविष्य में उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर भी चर्चा हुई।
विद्यार्थियों को बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार अथवा किसी संस्था का दायित्व नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। जल का विवेकपूर्ण उपयोग, प्लास्टिक पर निर्भरता कम करना, वृक्षों और जलस्रोतों की रक्षा करना तथा अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचना जैसे छोटे प्रयास भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम में ‘स्वदेशी अपनाओ’ विषय पर भी विद्यार्थियों के साथ गहन चिंतन एवं मनन किया गया। स्थानीय एवं स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देने और देश के उत्पादकों, कारीगरों, श्रमिकों तथा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के महत्व पर चर्चा हुई। विद्यार्थियों को खरीदारी करते समय अपनी वास्तविक आवश्यकता, वस्तु की गुणवत्ता तथा उपलब्ध स्वदेशी विकल्पों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया गया।
इसी क्रम में ‘सिविक सेंस’ अर्थात नागरिक बोध पर चर्चा करते हुए सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, यातायात नियमों का पालन, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और समाज के अन्य लोगों के अधिकारों का सम्मान करने जैसे विषयों को जिम्मेदार नागरिकता से जोड़ा गया। विद्यार्थियों ने जाना कि केवल अपने अधिकारों की अपेक्षा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हुए अपने नागरिक कर्त्तव्यों का पालन करना भी आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने इन विचारों को केवल चर्चा तक सीमित न रखते हुए उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। युवाओं ने अनावश्यक एवं अनुचित डिजिटल कंटेंट से दूर रहने, मोबाइल का कम से कम और आवश्यकता के अनुरूप उपयोग करने तथा परिवार के साथ बैठकर रात्रिभोजन करने का संकल्प लिया। उन्होंने अपने परिवार के बुजुर्गों से संवाद बढ़ाने और अपने पूर्वजों एवं पारिवारिक परंपराओं के बारे में जानने का भी निश्चय किया।
साथ ही विद्यार्थियों ने प्लास्टिक, अनावश्यक कंक्रीटीकरण और वाहनों के गैर-जरूरी उपयोग को कम करने, तालाबों, नदियों, वनों एवं वन्यजीवों सहित प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान देने, स्वदेशी एवं स्थानीय वस्तुओं को प्राथमिकता देने तथा अपने नागरिक कर्त्तव्यों का जिम्मेदारीपूर्वक पालन करने की शपथ ली।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने जाना कि समाज और राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन केवल बड़े प्रयासों से ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के दैनिक जीवन की छोटी-छोटी जिम्मेदार आदतों से भी प्रारंभ होता है। परिवार से जुड़ाव, समाज में समरसता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, स्वदेशी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और नागरिक कर्त्तव्यों का पालन—इन सभी के समन्वय से ही जिम्मेदार युवा और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम ने युवाओं के बीच यह संदेश प्रमुखता से रखा कि ‘अधिकार और कर्त्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं’ तथा जागरूक, संवेदनशील और कर्त्तव्यनिष्ठ युवा ही सशक्त परिवार, समरस समाज, सुरक्षित पर्यावरण और समर्थ राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते
कार्यक्रम में श्री पंकज सिंह एवं श्री रविकांत ने मुख्य रूप से विभिन्न विषयों को छात्र-छात्राओं के समक्ष प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रिंसिपल श्री इंद्रनाथ सिन्हा का विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक एवं नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने और जीवन में अच्छे संस्कारों एवं कर्त्तव्यबोध को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में अंतु चक्रबर्ती एवं विद्यालय के अन्य शिक्षकों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।