आईआईटी धनबाद में स्वच्छता के सिपाहियों का सम्मान
डीजे न्यूज, धनबाद : आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटे सफाई मित्रों और स्वयंसेवकों के योगदान को सम्मान देते हुए बुधवार को पेनमैन ऑडिटोरियम में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस) अभियान 2026 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थान परिसर को स्वच्छ, हरा-भरा और सुंदर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाने वाले सफाई मित्रों, स्वच्छता समन्वयकों, स्वयंसेवकों तथा विभिन्न क्लबों और टीमों के सदस्यों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में धनबाद नगर निगम के नगर आयुक्त आशीष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा, उप निदेशक प्रो. शरत कुमार दास, रजिस्ट्रार प्रो. प्रबोध पांडेय, एसोसिएट डीन प्रो. संजीव आनंद साहू और अभियान की नोडल समन्वयक प्रो. मधुलिका गुप्ता समेत कई अधिकारी, कर्मचारी और क्लबों के सदस्य मौजूद रहे।
**स्वच्छता को आदत और व्यवहार में शामिल करना जरूरी**
संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि स्वच्छता का अर्थ केवल अपने आसपास की जगह को साफ रखना नहीं है, बल्कि इसे अपनी आदत और व्यवहार का हिस्सा बनाना भी जरूरी है। ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जिसमें लोग स्वयं गंदगी फैलाने से बचें और स्वच्छता बनाए रखना अपनी जिम्मेदारी समझें।
उप निदेशक प्रो. शरत कुमार दास ने सफाई मित्रों और स्वयंसेवकों के समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि शनिवार की सुबह भी समय निकालकर परिसर की सफाई में भाग लेना उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह केवल नौकरी का हिस्सा नहीं, बल्कि परिसर को स्वच्छ रखने के प्रति उनका जुनून है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से स्वच्छता गतिविधियों में भाग लेने और अभियान को पूरे वर्ष जारी रखने की अपील की।
**सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल में कमी लाने पर जोर**
धनबाद नगर निगम के नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने संस्थान के स्वच्छ परिसर की सराहना करते हुए सफाई मित्रों को स्वच्छता व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक को पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए इसके उपयोग को कम करने, कचरे का उचित निस्तारण करने और नागरिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की पहल का प्रभाव संस्थान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई देना चाहिए।
एसोसिएट डीन प्रो. संजीव आनंद साहू ने कहा कि स्वच्छता को किसी खास दिन, सप्ताह या पखवाड़े तक सीमित रखने के बजाय इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने परिसर को साफ-सुथरा और सुंदर बनाए रखने में सफाई मित्रों, विभिन्न क्लबों और अभियान से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की।
रजिस्ट्रार प्रो. प्रबोध पांडेय ने कहा कि संस्थान में आने वाले विद्यार्थियों, अभिभावकों और अतिथियों से परिसर की हरियाली, साफ सड़कों, फुटपाथों और बेहतर रखरखाव को लेकर मिलने वाली सकारात्मक प्रतिक्रिया सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने इस पहल को सालभर जारी रखने और आसपास के क्षेत्रों में भी स्वच्छता गतिविधियों का विस्तार करने की अपील की।
**तालाब की सफाई से पौधारोपण तक चला अभियान**
अभियान की नोडल समन्वयक प्रो. मधुलिका गुप्ता ने बताया कि संस्थान में पांच स्वच्छता लक्षित इकाइयों की पहचान कर सफाई अभियान चलाया गया। इसके अलावा सामूहिक श्रमदान, रानी बांध तालाब की सफाई, गांधी जयंती पर स्वच्छता रैली तथा कचरे के पृथक्करण और सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
स्थानीय दुकानदारों, सब्जी विक्रेताओं और आम नागरिकों को कपड़े एवं जूट के थैले वितरित किए गए। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण और ‘वेस्ट टू वेस्ट’ प्रतियोगिता भी आयोजित हुई। सफाई मित्रों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने के साथ आयुष्मान भारत योजना के प्रति जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए।
प्रो. शरत कुमार दास ने बताया कि स्वच्छता संबंधी शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था भी बनाई गई है। विद्यार्थी शिकायतें संबंधित टीम तक पहुंचाते हैं, जिसके बाद समाधान की कार्रवाई की जाती है और शिकायतकर्ता को भी इसकी जानकारी दी जाती है।
अभियान में सेंटर ऑफ सोसाइटल मिशन, ईआईएसएपी, दीप्ति लेडीज क्लब, संपूर्णा लेडीज क्लब, स्कोलोमिन क्लब, स्टाफ रिक्रिएशन क्लब, शॉप इंस्पेक्शन टीम, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और स्वच्छता समन्वयकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम में संदेश दिया गया कि स्वच्छता किसी एक व्यक्ति या विभाग की नहीं, बल्कि सभी की साझा जिम्मेदारी है। इसे प्रभावी बनाए रखने के लिए नियमित भागीदारी और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।