81 गुस्टी, 81 आंकड़ा और 81 किलोमीटर तक गूंजा डहरे सोहराय का संदेश, कुड़मी समाज ने दिखाई एकजुटता
डीजे न्यूज, धनबाद: वृहद झारखंड आदिवासी कुड़मी मंच एवं झारखंड आदिवासी कला संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को तोपचांची प्रखंड के मानटांड़ स्थित जीटी रोड के समीप भव्य डहरे सोहराय पर्व का आयोजन किया गया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत धनबाद जिले के बरवाअड्डा से लेकर गिरिडीह जिले के बगोदर तक लगभग 81 किलोमीटर के दायरे में 81 गुस्टी और 81 आंकड़ा की परिकल्पना के साथ यह आयोजन किया गया। इसमें बरवाअड्डा, राजगंज, तोपचांची, डुमरी एवं बगोदर सहित विभिन्न क्षेत्रों के कुड़मी समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
मानटांड़ में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं विधि-विधान के साथ की गई। कुड़माली नेगा चारी के माध्यम से अखड़ा में पूजा-अर्चना कर समाज की परंपरा और आस्था का परिचय दिया गया। इसके बाद महिला एवं पुरुषों ने पारंपरिक झूमर नृत्य प्रस्तुत कर पूरे अखड़ा को उत्सव के रंग में रंग दिया। पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और झूमर नृत्य ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सोहराय कुड़मी समाज का महत्वपूर्ण पारंपरिक परब है। यह परब समाज की संस्कृति, सभ्यता, रीति-रिवाज और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। अपनी सांस्कृतिक पहचान एवं विरासत को बचाने के लिए कुड़मी समाज लगातार संघर्षरत है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महादेव महतो ने कहा कि कुड़मी समाज की अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपरा है, जिसे संरक्षित रखना समाज के सदस्य की जिम्मेदारी है।
वहीं, कुड़मी समाज के युवा नेता सदानंद महतो ने कहा कि कुड़मी समाज की पहचान उसकी 81 गुस्टी, कुड़माली भाषा, संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ी हुई है। अपनी भाषा, संस्कृति और सामाजिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए समाज लगातार संघर्ष कर रहा है। डहरे सोहराय जैसे आयोजन समाज को एकजुट करने और आने वाली पीढ़ियों तक अपनी सांस्कृतिक विरासत बचाने का सशक्त माध्यम हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में ओमप्रकाश महतो, तुलसी महतो, गीता देवी, विनोद बिहारी महतो, संतोष महतो, नंदलाल महतो, सुरेश महतो, अशोक महतो, धीरन महतो, महेंद्र महतो, सावित्री देवी, चंचला देवी, वनी देवी, मीना देवी, रीता देवी, बबिता देवी एवं पूजा देवी, गिरिधारी प्रसाद महतो , बिदेश्वरी प्रसाद महतो , विक्की कुमार महतो , सहदेव महतो , विवेक महतो सहित अन्य लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में कुड़मी समाज के महिला-पुरुष उपस्थित रहे। पारंपरिक उत्साह और सामाजिक एकजुटता के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया गया।