माकपा ने मनाया महान अक्टूबर क्रांति की 109 वीं वर्षगांठ, मेहनतकशों को संगठित कर संघर्षों को आगे ले जाने का लिया संकल्प

माकपा ने मनाया महान अक्टूबर क्रांति की 109 वीं वर्षगांठ, मेहनतकशों को संगठित कर संघर्षों को आगे ले जाने का लिया संकल्प

डीजे न्यूज, रांची: सीपीआई (एम) राज्य  कार्यालय में शनिवार को महान अक्टूबर क्रांति की 109 वीं वर्षगांठ का आयोजन किया गया।  वक्ताओं ने कहा कि मानव सभ्यता के इतिहास में  दुनिया में पहली बार 7 नवंबर 1917
( पूराने रूसी केलेंडर के अनुसार अक्टूबर) को विश्व सर्वहारा के महान नायक   कामरेड लेनिन के नेतृत्व मे  सोवियत युनियन में वोल्शेविक क्रांति के माध्यम से मजदूर वर्ग की सत्ता कायम हुई। जिसे प्रथम समाजवादी क्रान्ति भी कहा जाता है। यह एक नए समाजवादी समाज की स्थापना के लिए मजदूरों, किसानों तथा अन्य शोषित तबकों की पहली सफल क्रांति थी। इस क्रांति ने हमारे देश भारत सहित पूरी दुनिया में उपनिवेशवाद से गुलामी की खिलाफ आम लोगों को अपने देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया और एशिया व अफ्रीका में चल रहे राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों को एक नई ऊर्जा प्रदान की। इस क्रांति ने मानवता को यह दिखाया कि पूंजीवाद का अंत कर समाजवादी समाज का निर्माण किया जा सकता है और मनुष्य द्वारा मनुष्य का शोषण खत्म किया जा सकता है। 1789 को फ्रॉंस में हुई राज्य क्रांति ने जिन तीन नारों, स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा का नारा दिया था। उसे मूर्त रूप देने का प्रयास पेरिस कम्यून  से होते हुए सोवियत संघ मे सफल हुआ। दुनिया मे पहलीबार  मजदूर वर्ग के शासन मे श्रम की गरिमा को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हुआ और एक नये शोषण विहिन समाज के निर्माण की आधारशिला रखी गई।
पार्टी नेताओं ने कहा कि सोवियत समाजवादी गणतंत्र की उपलब्धियों की चर्चा में गए बगैर, हम यह कह सकते हैं की इस क्रांति ने पुराने सम्राज्यवाद  को ना सिर्फ इतिहास की कहानी बना दिया बल्कि  इस क्रांति के बगैर  पूरी मानवता को खूनी , जंगखोर   नाजीवाद  का दंश झेलना पड़ता।
आज इतिहास चक्र पीछे की ओर लौटाने की कोशिश हो रही है। सभी तरह की प्रतिक्रियावादी, नव-फासीवादी ताकतों को हर प्रतिरोध  मे कम्युनिस्टों की साजिश दिखाई दे रही है।
कम्युनिस्ट घोषणापत्र मे मार्क्स की यह उक्ति, पूरी दुनिया पर सटीक बैठती है कि ‘आज सिर्फ यूरोप नहीं  पूरी दुनिया के शासकवर्गों को कम्युनिज्म का भूत सता रहा है’। ट्रम्प को ज़हरान मामदनी कम्युनिस्ट लग रहा है, मोदी को, सरकार के सभी आलोचक दिमागी  नक्सल लग रहे है, और जेएनयू सहित विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों/संस्थानों को वाम आतंकवादियों का गढ़ कह कर प्रचारित किया जा रहा है।
आवारा वित्तीय पूंजी के दौर में नव-उदारवादी सम्राज्यवाद गंभीर संकट के दौर में है। इसी के गर्भ से नव-फासीवाद पैदा हुआ है।
दुनिया भर के क्रांतिकारियों को  मार्क्सवाद -लेनिनवाद की क्रन्तिकारी शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए और पूर्व की गलतियों और कमजोरियों  जिसके चलते सोवियत संघ में समाजवाद का पराभव हुआ। उससे शिक्षा लेते हुए 21 वीं सदी मे वैज्ञानिक समाजवाद के सपने को साकार करने के लिए आगे बढ़ना होगा। फिलिस्तीन में नरसंहार का जिम्मेवार इस्त्राइली दरिंदा नेत्येनहाऊ  ईरान पर युद्ध थोप कर उसे बर्बाद किए जाने का साजिशकर्ता साम्राज्यवादी सरगना अमेरिका का डोनाल्ड ट्रंप आज हताशा में है  क्योंकि हाल के चुनाव में दोनों को झटका लगा है। ब्राजील में पुनः साम्राज्यवाद विरोधी राष्ट्रपति लूला की जीत एक सकारात्मक घटनाक्रम है। वर्तमान समय में दुनिया के विकासशील देश साम्राज्यवाद के आक्रामक रवैये के खिलाफ एकजुटता बढाने की कोशिश कर
रहे हैं जो इस बात का संकेत है कि साम्राज्यवाद और समाजवाद का अंतर्विरोध तीखा हो रहा है। इस परिस्थिति में आइए  पूंजीवाद की इस क्रूर अमानवीय व्यवस्था को समाप्त कर एक नए शोषण मुक्त समाज की स्थापना के लिए प्रथम समाजवादी क्रान्ति की 109 वीं वर्षगांठ पर यह शपथ लें की भारत में मेहनतकशों को संगठित कर उनके संघर्षों को आगे ले जायेगें।
कार्यक्रम को पार्टी के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, समीर दास, सुखनाथ लोहरा और अमल आजाद ने संबोधित किया। प्रतीक मिश्र ने ब्रेख्त की कविता का पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रफुल्ल लिंडा ने की। मौके पर विरेन्द्र कुमार, बीना लिंडा, अमित राय, सैयद फराज, एस. के. राय, हरेंद्र यादव, अरशद इकबाल, सुधांशु शेखर, रामयज्ञ मिश्र और सुमंत कुमार साहु समेत दर्जनों व्यक्ति उपस्थित थे।

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