POCSO कानून, साइबर अपराध और ऑनलाइन शोषण से बचाव को लेकर खैरा के आदर्श मध्य विद्यालय में जागरूकता कार्यशाला आयोजित
डीजे न्यूज, जमुई : बच्चों को बाल यौन शोषण से बचाने, उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने और किसी भी तरह के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शनिवार को आदर्श मध्य विद्यालय, खैरा में जागरूकता कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा), जमुई की ओर से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में संचालित सुरक्षित बचपन अभियान के तहत यह कार्यक्रम हुआ।
कार्यशाला में विद्यार्थियों और शिक्षकों को पॉक्सो (POCSO) अधिनियम-2012 के प्रावधानों, बाल यौन शोषण की पहचान, रोकथाम और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साथ ही साइबर अपराध, इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग और पोर्नोग्राफी जैसे आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट से जुड़े खतरों के प्रति भी जागरूक किया गया।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन स्थायी लोक अदालत, जमुई के सदस्य ऋतेश चन्द्र ने किया। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों के हित में बने इस महत्वपूर्ण कानून की सफलता उनकी चुप्पी टूटने से ही संभव है। बच्चों को शर्म और डर से बाहर निकलकर शोषण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके।
वहीं स्थायी लोक अदालत की सदस्य नीतू कुमारी ने शिक्षकों से पॉक्सो कानून का अध्ययन करने और समय-समय पर विद्यार्थियों को इसके प्रावधानों की जानकारी देने की अपील की। उन्होंने बच्चों को समझाया कि सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त बचपन पाना उनका अधिकार है। किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार, शोषण या ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय अभिभावक, शिक्षक अथवा संबंधित प्राधिकरण को इसकी सूचना देनी चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्रधानाचार्य दिलीप कुमार ने की। उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सुरक्षित वातावरण और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता को जरूरी बताया। समापन सत्र में शिक्षक राजीव रंजन और प्रशांत कुमार ने बच्चों की सुरक्षा में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
मौके पर शिक्षिका सुनैना कुमारी, प्रीतीश चंदा, रागिनी कुमारी, जूली कुमारी सहित विद्यालय के अन्य शिक्षक एवं कर्मी उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डालसा के मुकेश कुमार, उत्तम कुमार और पीएलवी विश्वजीत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों का सुरक्षित बचपन सुनिश्चित करना केवल कानून और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।