गिरिडीह में झामुमो की अग्निपरीक्षा

गिरिडीह में झामुमो की अग्निपरीक्षा

सहानुभूति बनाम भाजपा-जयराम फैक्टर

दिलीप सिन्हा, राजनीतिक संवाददाता, देवभूमि झारखंड न्यूज, गिरिडीह : सूबे के नगर विकास मंत्री तथा झामुमो के संकट मोचक की भूमिका में रहे सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से खाली हुई उनकी गिरिडीह विधानसभा सीट पर उप चुनाव होना है। दिवंगत मंत्री सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा ने उनकी राजनीतिक विरासत संभाल ली है। अपने आंसू पोंछकर वह अपनी बेटियों के साथ जनता के बीच जा रही हैं। साफ है कि झामुमो और इंडी गठबंधन से श्वेता शर्मा प्रत्याशी होंगी। भाजपा ने अभी अपना पत्ता नहीं खोला है। जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो किसे मैदान में उतारेंगे, यह भी अभी साफ नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में जेएलकेएम प्रत्याशी रहे नवीन चौरसिया दिवंगत हो चुके हैं। मंत्रियों के निधन से खाली हुए मधुपुर, डुमरी और घाटशिला में जिस तरह आसानी से झामुमो ने उप चुनाव जीत लिया, उतना आसान झामुमो के लिए गिरिडीह विधानसभा उप चुनाव नहीं है। पिछले आंकड़ों को देखें तो साफ है कि झामुमो के लिए यहां भाजपा मुश्किल खड़ा कर सकती है। झामुमो के लिए इस उप चुनाव में भाजपा की ही तरह टाइगर जयराम महतो भी परेशानी का कारण बन सकते हैं। जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम ने यदि यहां अच्छा प्रदर्शन किया तो इससे कहीं न कहीं नुकसान झामुमो को होना तय है। इस उप चुनाव में झामुमो के लिए सहानुभूति लहर सबसे बड़ा सहारा हो सकता है। झामुमो के समक्ष पिछले विधानसभा चुनाव में मिले शहरी वोटों को समेटकर रखने और पीरटांड़ में जेएलकेएम को रोकने की चुनौती होगी। वैसे गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में विकास की जो लंबी लकीर खींचकर सुदिव्य सोनू गए हैं, वह झामुमो को ताकत देगा।

पिछले चुनाव के आंकड़े क्या कहते हैं

पिछले विधानसभा चुनाव का परिणाम देखें तो पता चलेगा कि झारखंड की राजनीति में बुलंदी पर होने के बावजूद सुदिव्य सोनू बड़ी मुश्किल से अपनी सीट निकाल सके थे। सुदिव्य सोनू को 94,042 वोट मिले थे। भाजपा प्रत्याशी और पूर्व विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी ने 90,204 वोट लाकर उन्हें कड़ी टक्कर दी थी। टाइगर जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम पहली बार चुनाव में उतरी थी। उसके प्रत्याशी नवीन आनंद चौरसिया 10,787 वोट लाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। शहरी क्षेत्रों में भाजपा के वोटों में सेंधमारी कर सुदिव्य सोनू दूसरी बार विधानसभा पहुंचे थे। वैसे उनकी जीत का अंतर कम होने का कारण जेएलकेएम को माना गया था। जेएलकेएम ने झामुमो के गढ़ पीरटांड़ में अच्छा प्रदर्शन किया था। विशेषकर वहां के महतो वोटर, जो शुरू से झामुमो के समर्थक रहे हैं, खिसककर जेएलकेएम की ओर चले गए थे। इसका प्रभाव यह पड़ा कि सुदिव्य सोनू की जीत का अंतर कम हो गया था। 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सीटिंग विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी को करीब 15 हजार से भी अधिक वोटों से हराकर सुदिव्य सोनू पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। सुदिव्य सोनू को जहां 80,871 वोट मिले थे, वहीं निर्भय शाहाबादी को 64,987 वोट मिले थे। जबकि बाबूलाल मरांडी की उस वक्त की पार्टी झाविमो के प्रत्याशी चुन्नूकांत को 6,903 वोट मिले थे।

 

गिरिडीह में मुन्ना लाल ने तैयार की झामुमो की जमीन, सुदिव्य सोनू ने बनाया उपजाऊ

गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र भले ही झामुमो के संस्थापक द्वय विनोद बिहारी महतो एवं शिबू सोरेन की राजनीतिक कर्मभूमि रही है, लेकिन यह झामुमो का गढ़ नहीं बन सका था। झामुमो की जमीन यहां मुन्ना लाल ने तैयार की थी और उस जमीन को झामुमो के लिए फिर से उपजाऊ बनाने का क्रेडिट सुदिव्य कुमार सोनू को जाता है। पहली बार झामुमो से इस सीट पर कब्जा मुन्ना लाल ने 2005 के विधानसभा चुनाव में किया था। उस चुनाव में मुन्ना लाल 31, 895 वोट लाकर विजयी हुए थे। दूसरे नंबर पर भाजपा के चंद्रमोहन प्रसाद रहे थे। उन्हें 24, 920 वोट मिले थे। वहीं राजद के निर्भय शाहाबादी को 21,029 वोट मिले थे। वहीं सुदिव्य सोनू लगातार दो बार यहां से चुनाव जीते थे।

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