अर्निंग प्लेस’ से बढ़कर लर्निंग प्लेस’ है विद्या भारती : डॉ. ब्रजेश
विद्या भारती बनी सीखने की पाठशाला
डीजे न्यूज, गिरिडीह : सरस्वती शिशुवद्या मंदिर बरगंडा के हिंदी आचार्य डॉ. ब्रजेश बर्णवाल ने विद्या भारती में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विद्यालय उनके लिए केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि सीखने, सिखाने और स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने की कर्मभूमि है। उन्होंने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद जीवन की व्यवहारिक और वास्तविक शिक्षा उन्हें विद्या भारती में कार्य करते हुए मिली।
डॉ. ब्रजेश ने कहा कि विद्यालय में प्रत्येक दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। शैक्षिक नवाचारों से लेकर संस्कार और जीवन-मूल्यों तक, वरिष्ठ आचार्यों, विद्वानों और बच्चों से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। यही निरंतर सीखने की प्रक्रिया उनके लिए इस कार्य को विशेष बनाती है।
उन्होंने कहा कि परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वेतन और भविष्य को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है, लेकिन विद्यालय में प्रवेश करते ही उनका ध्यान बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य पर केंद्रित हो जाता है। उनका प्रयास रहता है कि बच्चों को विषय की जानकारी देने के साथ उनमें जिज्ञासा, संस्कार और सीखने की रुचि भी विकसित हो।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में प्रधानाचार्य द्वारा सौंपे गए कार्यों और संगठन की योजनाओं को पूरा करने में वह पूरी निष्ठा से जुटते हैं। उनके अनुसार छात्र जीवन में परीक्षा के दौरान जिस तरह पढ़ाई को लेकर एकाग्रता रहती थी, आज वही एकाग्रता बच्चों के भविष्य को लेकर रहती है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले चिंता अपने परिणाम की होती थी, अब चिंता विद्यार्थियों के भविष्य की है।
डॉ. ब्रजेश ने कहा कि विद्या भारती उनके लिए ‘अर्निंग प्लेस’ से कहीं अधिक ‘लर्निंग प्लेस’ है। आचार्य के रूप में विद्यालय के कार्यों के लिए समाज के बीच जाने पर उन्हें गर्व महसूस होता है। उन्होंने कहा कि वह इसे महज नौकरी नहीं मानते, बल्कि बच्चों में संस्कार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने के प्रयास के रूप में देखते हैं।