बाल विवाह सामाजिक व कानूनी अपराध: झारखंड सांस्कृतिक मंच

बाल विवाह सामाजिक व कानूनी अपराध: झारखंड सांस्कृतिक मंच

बच्चों को शिक्षित कर स्वावलंबी बनाने पर जोर

डीजे न्यूज, धनबाद : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) के तत्वावधान में ‘झारखंड सांस्कृतिक रंगमंच’ के कलाकारों द्वारा बाल विवाह के खिलाफ धनबाद के रणधीर वर्मा चौक में एक सशक्त नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से आम जनता को बाल विवाह के दुष्प्रभावों और इससे जुड़े कड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य संयोजक पिंकू कुमारी पासवान ने बताया कि यह केवल एक नाटक या मंचन नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक कड़वा सच है। उन्होंने कहा कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उनका विवाह कर देना उनके भविष्य को अंधकार में धकेलने जैसा है। आयोजन के दौरान लोगों को चेतावनी देते हुए बताया गया कि बाल विवाह कराना एक गंभीर कानूनन अपराध है। यदि कोई बाल विवाह कराते हुए पकड़ा जाता है, तो कानून केवल दूल्हा-दुल्हन के माता-पिता या बारात लाने वालों तक ही सीमित नहीं रहता। इसमें शामिल होने वाले बाराती, पंडित/काजी, मैरिज हॉल/डेकोरेशन वाले, बाजा बजाने वाले और खाना बनाने वाले कैटरर्स भी समान रूप से दोषी माने जाएंगे और उन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है। रंगमंच के कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्वास्थ्यगत पहलुओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कम उम्र में विवाह से लड़कियां शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो जाती हैं। जिस उम्र में बच्चों को हसने-खेलने और पढ़ने का मौका मिलना चाहिए, उस उम्र में वे मां बन जाती हैं। इससे वे गंभीर रूप से एनीमिया (खून की कमी) का शिकार हो जाती हैं। शारीरिक रूप से असमर्थ होने के कारण वे न तो अपना भविष्य संभाल पाती हैं और न ही अपने बच्चों को सही शिक्षा व पोषण दे पाती हैं। पिंकू कुमारी पासवान ने आम जनता से अपील की कि वे अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए उन्हें पढ़ाई-लिखाई का पूरा मौका दें। बच्चों को आत्मनिर्भर और अपने पैरों पर खड़ा होने दें, उसके बाद ही उनका विवाह तय करें। संस्था ने संकल्प जताया कि वे नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से गांव-गांव और शहर-शहर जाकर बाल विवाह के खिलाफ यह अलख जगाते रहेंगे।

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