युवाओं को आत्मअनुशासन और राष्ट्रसेवा की राह दिखाता है विवेकानंद का संदेश : निवेदिता भिड़े
डीजे न्यूज, धनबाद : आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में मंगलवार को संस्थान के शताब्दी वर्ष के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की ओर से शताब्दी व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित एवं विवेकानंद रॉक मेमोरियल और विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी की अखिल भारतीय अध्यक्ष सु. निवेदिता रघुनाथ भिड़े ने “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको : युवाओं के लिए एक संदेश” विषय पर छात्रों और संस्थान के सदस्यों को संबोधित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं कार्यक्रम समन्वयक प्रो. रवि कुमार गंगवार ने सु. निवेदिता भिड़े के परिचय से की। उन्होंने सामाजिक कार्य, शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और विवेकानंद केंद्र से उनके लंबे जुड़ाव की जानकारी दी।
आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार किसी एक दौर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आज भी मानव समाज के लिए प्रासंगिक हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव व्यक्तित्व का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवेकानंद के विचारों को केवल याद करने के बजाय उनके मूल संदेश को समझकर जीवन में उतारना जरूरी है।
सु. निवेदिता भिड़े ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको” का संदेश युवाओं को प्रेरित करने के साथ भारत के पुनरुत्थान का भी आह्वान था। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता को स्वीकार करने और प्रत्येक व्यक्ति को अपनेपन की भावना से देखने में निहित है।
उन्होंने “उठो” का अर्थ बताते हुए कहा कि युवाओं को आलस्य, जड़ता, ईर्ष्या और पहल करने की कमी से बाहर निकलना होगा। वहीं “जागो” का अर्थ अपने जीवन और देश के उद्देश्य को समझना है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति केवल मजबूत अर्थव्यवस्था, सेना और विज्ञान-तकनीक तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश की मूल भावना को जीवन में उतारना भी जरूरी है।
सु. निवेदिता ने धर्म को केवल पूजा-पाठ या रिलिजन तक सीमित न रखते हुए कर्तव्य, जिम्मेदारी, त्याग और दूसरों के प्रति सम्मान से जोड़कर समझाया। उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी है और अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाना धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने युवाओं को मोबाइल और डिजिटल तकनीक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की सलाह दी। कहा कि तकनीक ज्ञान हासिल करने और सामाजिक समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकती है, लेकिन अनुशासन के अभाव में यही तकनीक समय की बर्बादी का कारण भी बन सकती है। छात्रों को अनुशासन, एकाग्रता, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पेशेवर लक्ष्य समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन जीवन का व्यापक उद्देश्य देश और समाज के लिए योगदान देना होना चाहिए। आईआईटी (आईएसएम) के छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने विज्ञान एवं तकनीक को सामाजिक जरूरतों से जोड़ने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने सु. निवेदिता भिड़े को सम्मानित किया। इस अवसर पर संस्थान के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।