एमएमडीआर संशोधन विधेयक लागू होते ही केंद्र और झारखंड में टकराव, पूरे देश में हो सकता बिजली संकट
22 अगस्त से पैसा जमा करने वाली पावर कंपनियों को झारखंड सरकार के पोर्टल से नहीं मिल रही अनुमति, पावर प्लांटों को कोयला ठप
कोल कंपनियों के सीएमडी ने झारखंड सरकार को लिखा पत्र, नहीं मिला जवाब
देवभूमि झारखंड न्यूज विशेष
दिलीप सिन्हा, राजनीतिक संवाददाता, देवभूमि झारखंड न्यूज, धनबाद : खान और खनिज (एमएमडीआर) संशोधन विधेयक 2026 के जमीन पर उतरते ही झारखंड में केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस टकराव का सीधा असर राज्य के पावर प्लांटों पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि 22 अगस्त के बाद पैसा जमा करने वाली पावर कंपनियों के कोयला उठाव को झारखंड सरकार के पोर्टल से अनुमति नहीं मिल पा रही है। इसके कारण पावर प्लांटों को कोयले की आपूर्ति प्रभावित हो गई है और आने वाले दिनों में झारखंड समेत पूरे देशभर में जबरदस्त बिजली संकट पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।
एमएमडीआर संशोधन विधेयक के संसद से पारित होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसके खिलाफ झारखंड में ऐसा आंदोलन करने की घोषणा की थी, जिसे पूरा देश देखेगा। फिलहाल आंदोलन शुरू होने से पहले ही इस विधेयक को लेकर केंद्र और राज्य के बीच टकराव का असर खनन और कोयला आपूर्ति व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है।
क्या है मौजूदा संकट
केंद्र सरकार ने खान और खनिज (एमएमडीआर) संशोधन विधेयक 2026 को अधिसूचना जारी कर 22 अगस्त से पूरे देश में लागू कर दिया है। इस कारण, राज्यों को खनन भूमि के इस्तेमाल के बदल कर एवं उप कर वसूलने का अधिकार समाप्त हो गया है। अब यह केंद्र सरकार ने अपने अधीन ले लिया है।
इसके लागू होने के साथ झारखंड सरकार को खनन जमीन के इस्तेमाल के बदले प्रति टन मिलने वाला 450 रुपये और उस पर जीएसटी का भुगतान बंद हो गया है। इसके अलावा झारखंड के वैसे जिले जहां मिनरल्स एरिया है वहां मिलने वाली बेसिक वेल्यू का एक प्रतिशत बाजार फी भी मिलना बंद हो गया है।
इसके बाद झारखंड सरकार ने अपने पोर्टल पर नई व्यवस्था को लागू नहीं किया है। इसका सीधा असर कोयला उठाव पर पड़ा है। 22 अगस्त से पहले जिन पावर प्लांटों ने कोयले के लिए पैसा जमा कर दिया था, उनका कोयला उठाव फिलहाल हो रहा है। लेकिन 22 अगस्त के बाद जिन कंपनियों ने पैसा जमा किया है, उनके कोयले का उठाव नहीं हो पा रहा है।
पोर्टल से अनुमति नहीं मिलने से फंसा कोयला
सूत्रों के अनुसार, 22 अगस्त के बाद पैसा जमा करने वाली पावर कंपनियों को कोयला उठाव के लिए झारखंड सरकार के पोर्टल पर अनुमति नहीं मिल रही है। ऐसे में पैसा जमा होने के बावजूद कोयला उठाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। कोल कंपनियों के सीएमडी ने इसे लेकर झारखंड सरकार को पत्र भी लिखा है हालांकि इसका कोई जवाब नहीं आया है।
इसका सबसे बड़ा असर राज्य के पावर प्लांटों पर पड़ रहा है। पावर प्लांटों के संचालन के लिए कोयले की नियमित आपूर्ति जरूरी है। यदि मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो प्लांटों में कोयले का स्टॉक कम होने के साथ बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकता है संकट
फिलहाल 22 अगस्त से पहले भुगतान कर चुके पावर प्लांटों को कोयला मिल रहा है, लेकिन बाद में भुगतान करने वाली कंपनियों का कोयला उठाव अटक गया है। यदि केंद्र और झारखंड सरकार के बीच इस मुद्दे पर जल्द कोई समाधान नहीं निकलता है तो आने वाले कुछ दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पावर प्लांट संचालकों के सामने अब सबसे बड़ी चिंता कोयले की नियमित आपूर्ति को लेकर है। वहीं, राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ सकती है। ऐसे में एमएमडीआर संशोधन विधेयक को लेकर शुरू हुआ केंद्र-राज्य टकराव अब सीधे बिजली उत्पादन और आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने की आशंका पैदा कर रहा है।
फिलहाल निगाह समाधान पर
एमएमडीआर संशोधन विधेयक के लागू होने के बाद पैदा हुई स्थिति ने कोयला उत्पादन, उठाव और बिजली उत्पादन से जुड़ी पूरी व्यवस्था को प्रभावित किया है। एक तरफ केंद्र सरकार की नई व्यवस्था लागू हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड सरकार के पोर्टल पर नई व्यवस्था के अनुरूप अनुमति नहीं मिलने से पावर कंपनियों का कोयला उठाव प्रभावित हो रहा है।
यदि जल्द इसका समाधान नहीं निकला तो इसका असर केवल पावर प्लांटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि झारखंड समेत पूरे देश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।