चंदा चोरी एवं एमएमडीआर संशोधन विधेयक के खिलाफ कांग्रेस ने दिया धरना
संशोधन विधेयक वापस ले केंद्र : डॉ. राकेश किरण महतो
जमीन, मेहनत और भविष्य पर यहां की जनता का अधिकार : अनुपमा सिंह
डीजे न्यूज, धनबाद: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से संबंधित चंदे में पारदर्शिता एवं निष्पक्ष जांच तथा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के विरोध में कांग्रेस ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राज्यों के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई।
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में प्रदेश महासचिव सह जिला कांग्रेस प्रभारी डॉ. राकेश किरण महतो तथा धनबाद लोकसभा की पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी अनुपमा सिंह शामिल थे।
झारखंड के अधिकारों को कमजोर करने वाला संशोधन वापस ले केंद्र : डॉ. राकेश किरण महतो
धरना को संबोधित करते हुए डॉ. राकेश किरण महतो ने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन के माध्यम से झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि यह झारखंड के हितों के लिए गंभीर विषय है और कांग्रेस पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी।
उन्होंने कहा कि झारखंड की अर्थव्यवस्था और यहां के लोगों का जीवन खनिज संसाधनों से गहराई से जुड़ा है। खनन से होने वाले राजस्व में राज्य का उचित अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए। केंद्र सरकार को ऐसा कोई कानून नहीं बनाना चाहिए, जिससे राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकार कमजोर हों।
डॉ. महतो ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ कांग्रेस चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाएगी और केंद्र सरकार को जनहित एवं राज्यहित में अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया जाएगा।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से संबंधित चंदे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपना योगदान दिया है। इसलिए चंदे के संग्रह और उपयोग में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। चंदे से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच तथा वित्तीय ऑडिट कराया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति देश के सामने आ सके।
झारखंड की जमीन, मेहनत और भविष्य पर पहला अधिकार यहां की जनता का : अनुपमा सिंह
धनबाद लोकसभा की पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी अनुपमा सिंह ने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा का भंडार नहीं, बल्कि यहां के लोगों की मेहनत, जमीन और भविष्य से जुड़ा प्रदेश है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित ऐसा कोई कानून नहीं बनाना चाहिए, जिससे राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और जनता के हित प्रभावित हों।
उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती से कोयला और अन्य खनिज निकलते हैं, लेकिन खनन के दुष्परिणाम भी सबसे अधिक यहां की जनता झेलती है। विस्थापन, प्रदूषण, पर्यावरणीय क्षति, रोजगार और पुनर्वास जैसी समस्याओं का सामना झारखंड के लोगों को करना पड़ता है। ऐसे में खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व में राज्य और खनन प्रभावित जनता का उचित हिस्सा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
अनुपमा सिंह ने कहा कि यदि खान एवं खनिज संशोधन अधिनियम, 2026 के माध्यम से राज्यों के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया गया तो कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि झारखंड के अधिकार, आर्थिक स्वायत्तता और आने वाली पीढ़ियों के हितों की लड़ाई है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से संबंधित चंदे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन के संग्रह और उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही होनी चाहिए। उन्होंने चंदे से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
जनविश्वास, पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी : संतोष सिंह
जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े चंदे में पूर्ण पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित होना जरूरी है। चंदे से संबंधित किसी भी प्रकार की अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई देश के सामने आए।
उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य का भी संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकार है। ऐसे प्रावधान, जो राज्यों की राजस्व प्राप्ति और वित्तीय स्वायत्तता को प्रभावित करते हैं, उन पर संवैधानिक एवं संघीय व्यवस्था की भावना के अनुरूप पुनर्विचार होना चाहिए।
संतोष कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड वर्षों से खनन के कारण विस्थापन, प्रदूषण, पर्यावरणीय क्षति और सामाजिक समस्याओं का सामना कर रहा है। इसलिए खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व में खनन प्रभावित राज्य और वहां की जनता के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस का आंदोलन किसी धार्मिक आस्था के विरोध में नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास, वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और राज्यों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा, “जनविश्वास, पारदर्शिता और राज्यों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज लगातार बुलंद करती रहेगी।”
उपायुक्त को सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के उपरांत धनबाद जिला कांग्रेस कमिटी के प्रतिनिधिमंडल ने धनबाद उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से संबंधित चंदे का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वित्तीय ऑडिट कराने, चंदे के संग्रह एवं उपयोग से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने तथा किसी भी वित्तीय अनियमितता के प्रमाणित होने पर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
साथ ही खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के उन प्रावधानों की संवैधानिक समीक्षा की मांग की गई, जो राज्यों के कराधिकार एवं वित्तीय स्वायत्तता को प्रभावित करते हैं। कांग्रेस ने केंद्र एवं राज्यों के बीच सहकारी संघवाद की भावना कायम रखते हुए झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों के हितों की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
कार्यक्रम को संबोधित करने वाले में एके झा, सुल्तान अहमद, मदन महतो, मुख्तार खान, मनोज यादव, दुर्गा दास, अब्दुल करीम अंसारी, राशिद राजा अंसारी, पिंटू तुरी, सीता राणा, बिलकिस ख़ानम, शाहिदा कमर, खैरुन्निसा, निशा सिंह, रेखा देवी, शंकर प्रजापति, कालीचरण यादव, लक्ष्मण तिवारी, जोगेंद्र सिंह, जोगी रामगोपाल भवानिया, मोहम्मद कयूम खान, अवध बिहारी प्रसाद, दिनेश यादव, महेंद्र दुबे, इरफान खान चौधरी, मंटू दास, राजू दास, जहीर अंसारी, संतोष चौधरी, अक्षवर प्रसाद, बम भोले सिंह, अनूप सिंह उर्फ डेविड बिरेंद्र पासवान, हरेंद्र शाही, शहजाद हुसैन, वकील बाउरी, मुकेश प्रसाद, रवि चौबे, बिजेंदर पासवान , दीपक सिंह, राजेश राम, प्रीतम रवानी, आशीष सिंह, सत्यनारायण पांडे, मोहम्मद इजहार अहमद रिजवी, गौतम पासवान, मनोज कुमार हाड़ी, मृत्युंजय कुमार सिंह, सतपाल सिंह उपस्थित थे।