बलियापुर के ग्रामीणों ने बीसीसीएल के खिलाफ आंदोलन की बनाई रणनीति
40 साल बाद भी जमीन के बदले नहीं मिला मुआवजा और नौकरी
डीजे न्यूज, बलियापुर(धनबाद): एमओसीपी एवं बीसीसीएल से विस्थापित हुए बलियापुर के ग्रामीणों की बैठक शुक्रवार को बेलगड़िया में रमेश राही की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में मुकुंदा परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले बकाया मुआवजा एवं नौकरी या अधिग्रहित भूमि की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाई गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1985 में मुकुंदा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट के नाम पर बीसीसीएल द्वारा बलियापुर के 16 गांवो के कुल 1759 एकड़ जमीन अधिग्रहण किया गया। इसके एवज में प्रबंधन द्वारा 971 रैयतों को नियोजन देने की स्वीकृति दी गई । बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा मात्र 309 किसानों को ही नौकरी दी गई । जमीन अधिग्रहण के 40 साल बाद भी विस्थापित हुए किसानों को अब तक उनके जमीन के बदले नियोजन नहीं दिया गया है। किसान अपनी मांगों को लेकर दर-दर भटकने को विवश हैं। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2012 में धनबाद के तत्कालीन उपायुक्त ने एक समझौते के तहत परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन का उपयोग नहीं होने पर किसानों को उनकी जमीन वापस करने का भरोसा दिलाया था। इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा पहल भी शुरू की गई लेकिन फिर मामला लटक गया। बाद में बीसीसीएल प्रबंधन ने अधिग्रहित भूमि में से 952 एकड़ भूमि को किसानों को बिना नियोजन दिए जरेडा को हस्तांतरित कर दिया। बैठक में विस्थापित रैयत किसानों ने भूमि वापसी की मांग को लेकर आंदोलन करने का निर्णय लिया। बैठक में पूर्व मुखिया जीतलाल सिंह, अतुल सिंह, मनबोध रवानी, सपन बनर्जी, सुभाष सिंह चौधरी समेत काफी संख्या में विस्थापित रैयत किसान मौजूद थे। बैठक का संचालन गौतम सिंह कर रहे थे।