आदिवासी समाज प्रकृति के साथ सह अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण : डॉ. इंद्रजीत कुमार

आदिवासी समाज प्रकृति के साथ सह अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण : डॉ. इंद्रजीत कुमार

विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, सम्मान, संस्कृति और योगदान को पहचानने तथा उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन : डॉ कौशल कुमार

डीजे न्यूज, टुंडी, धनबाद : विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर सरकारी डिग्री कॉलेज टुंडी में भव्य सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इंद्रजीत कुमार की अध्यक्षता में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत गीत के साथ हुआ। कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. कुसुम रानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला तथा आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और ज्ञान परंपरा को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्राचार्य डॉ. इंद्रजीत कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व, सामुदायिक जीवन और पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के अध्ययन एवं संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष राहुल तिर्की ने अपने व्याख्यान में आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति, भाषा, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके महत्वपूर्ण योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत भारत की विविधता और समृद्धि की पहचान है।

अगली वक्ता विषय विशेषज्ञ डॉ. नितिशा खालको ने अपने संबोधन में आदिवासी महिलाओं की भूमिका, शिक्षा, सामाजिक विकास तथा वर्तमान समय में आदिवासी समुदाय के समक्ष उपस्थित चुनौतियों और अवसरों पर विस्तृत विचार व्यक्त किए। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अमूल्य सुमन बेक ने आदिवासी संस्कृति, लोककला और पारंपरिक ज्ञान की विशिष्टताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों से जुड़े रहना चाहिए।

वहीं कृष्णमुरारी सिंह ने आदिवासी समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. कौशल कुमार, प्रॉक्टर, बि. बि. एम. के. यू., धनबाद ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, सम्मान, संस्कृति और योगदान को पहचानने तथा उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने विद्यार्थियों से सामाजिक समरसता, समानता और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्राओं ने पारंपरिक आदिवासी लोकनृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और मनमोहक नृत्य ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। छात्राओं द्वारा विश्व आदिवासी दिवस के महत्व, आदिवासी संस्कृति, शिक्षा तथा सामाजिक जागरूकता पर प्रभावशाली भाषण भी प्रस्तुत किए गए, जिन्हें उपस्थित सभी अतिथियों एवं विद्यार्थियों ने सराहा।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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