अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस विशेष:
धनबाद की पाठशाला बनी योगशाला, यहां योगा 365 दिन की जीवनशैली है
डीजे न्यूज, धनबाद: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर हम आपको ले चलते हैं धनबाद के एक ऐसे विद्यालय में, जहाँ योग केवल 21 जून का आयोजन नहीं, बल्कि 365 दिन की जीवनशैली है। यह है पाठशाला विद्यालय -धनबाद की एक ऐसी संस्था जिसने पिछले 12 वर्षों से निःशुल्क शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास को अपना ध्येय बनाया है।
एक अनूठी पहल
धनबाद के विभिन्न वंचित क्षेत्रों में संचालित पाठशाला विद्यालय में प्रतिदिन की शुरुआत सूर्य नमस्कार और प्राणायाम से होती है। यहाँ पढ़ने वाले 300 से अधिक बच्चों के लिए योग कोई अतिरिक्त गतिविधि नहीं, बल्कि दैनिक रूटीन का अभिन्न हिस्सा है।
विद्यालय के संस्थापक देव कुमार वर्मा ने बताया हमने 12 साल पहले जब यह निःशुल्क पाठशाला शुरू की थी, तो हमारा उद्देश्य सिर्फ अक्षर ज्ञान देना नहीं था। हम चाहते थे कि ये बच्चे स्वस्थ, अनुशासित और एकाग्रचित्त नागरिक बनें। योग न केवल स्वस्थ शरीर के लिए अति आवश्यक है, बल्कि यह बुद्धि को तेज, एकाग्रता को प्रबल और मन को शांत करता है। योग से बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होता है।
रिकियापीठ आश्रम तक का सफर
इस वर्ष ग्रीष्मावकाश को और अधिक सार्थक बनाने के लिए विद्यालय ने एक अनूठी पहल की। पाठशाला के 20 चयनित बच्चों को देवघर स्थित रिकियापीठ आश्रम ले जाया गया, जहाँ उन्होंने 12 दिवसीय आवासीय योग शिविर में भाग लिया। इस शिविर में बच्चों ने प्रमाणित योगाचार्यों से आसन, प्राणायाम, ध्यान, षट्कर्म और योग के दार्शनिक पहलुओं को सीखा।
आश्रम से लौटने के बाद ये बच्चे अब बाल योग शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। विद्यालय की प्रातःकालीन सभा में अब यही बच्चे अपने सहपाठियों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन और अनुलोम-विलोम सिखाते हैं। कक्षा 5 की छात्रा रिया कुमारी कहती है पहले मुझे पढ़ाई में मन नहीं लगता था। अब रोज सुबह योग करने से मेरा मन शांत रहता है और मैं ज्यादा देर तक ध्यान लगाकर पढ़ पाती हूँ।
योग का प्रभाव: अनुशासन से आत्मनिर्भरता तक
विद्यालय के शिक्षकों ने पिछले 3 वर्षों में बच्चों में उल्लेखनीय परिवर्तन देखे हैं।
स्वास्थ्य में सुधार: मौसमी बीमारियों से अनुपस्थिति 60% घटी है।
एकाग्रता में वृद्धि: कक्षा में ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ी है, परीक्षा परिणाम 25% बेहतर हुए हैं।
व्यवहार में बदलाव: बच्चों में क्रोध, चिड़चिड़ापन कम हुआ है। आपसी सहयोग और अनुशासन बढ़ा है।
आत्मविश्वास: मंच पर योग प्रदर्शन करने से बच्चों का स्टेज फियर खत्म हुआ है।
माता-पिता भी हुए शामिल
पाठशाला की यह पहल अब अभिभावकों तक भी पहुँच गई है। हर रविवार को पारिवारिक योग सत्र आयोजित किया जाता है, जहाँ बच्चों के साथ उनके माता-पिता भी योगाभ्यास करते हैं।
भविष्य की योजना: हर बस्ती, एक योगशाला
संस्थापक देव कुमार वर्मा ने घोषणा की कि अगले वर्ष से पाठशाला हर बस्ती, एक योगशाला अभियान शुरू करेगी। इसके तहत धनबाद की 10 नई बस्तियों में सामुदायिक योग केंद्र खोले जाएँगे, जहाँ पाठशाला के प्रशिक्षित बच्चे ही प्रशिक्षक की भूमिका निभाएँगे। हमारा सपना है कि धनबाद को ‘योग नगरी’ के रूप में पहचान मिले। हम चाहते हैं कि योग हर बच्चे की साँस बन जाए। क्योंकि स्वस्थ बच्चा ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण करेगा। उन्होंने कहा कि पाठशाला विद्यालय ने धनबाद के नागरिकों, कॉरपोरेट घरानों और स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की है कि वे इस मुहिम में योगदान दें।
यह कहानी सिर्फ एक स्कूल की नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जहाँ योग अब स्टूडियो से निकलकर झुग्गी-झोपड़ियों तक पहुँच रहा है। धनबाद की यह पाठशाला सचमुच एक ‘योगशाला’ बन गई है।