कांग्रेसी विधायकों की साजिश में शामिल हैं प्रभारी के राजू
माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लगाया कांग्रेस पर लगाया बड़ा आरोप
डीजे न्यूज, रांची : भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने मुख्यमंत्री व नेता इंडिया गठबंधन झारखंड को पत्र लिखकर
राज्यसभा चुनाव में माले विधायकों के बारे मेंं कांग्रेस प्रभारी के राजू के बयान का विरोध किया है।
मनोज भक्त ने अपने पत्र में लिखा है कि सबसे पहले इंडिया गठबंधन और झामुमो के राज्यसभा उम्मीदवार वैद्यनाथ राम की जीत के लिए भाकपा माले की ओर से बधाई स्वीकार करें। साथ ही, इंडिया गठबंधन के दूसरे उम्मीद्वार कांग्रेस प्रत्याशी की शर्मनाक हार पर अपनी पीड़ा व्यक्त करने में खुद को नहीं रोक पा रहा हूं। मैं आपके इस बात से सहमत हूं कि इस हार ने झारखंड को एकबार फिर कलंकित किया है। यह दुखद है कि जहां कांग्रेस को अपनी विफलता का स्पष्टीकरण जनता और इंडिया गठबंधन को देना चाहिए था, वहां वह झूठे आरोप मढ़ने की राजनीति खेल रही है।
मनोज भक्त ने कहा है कि हमारी पार्टी ने और इंडिया गठबंधन ने निर्णय किया था कि भाकपा माले के दोनों विधायक अरुप चटर्जी और चंद्रदेव महतो कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के पक्ष में वोट करेंगे। हमारे विधायकों ने इसका अनुपालन किया और हमारी पार्टी के पोलिंग एजेंट कामरेड ए के राय के सहयोगी और पोलित ब्यूरो सदस्य हलधर महतो एवं केंद्रीय कमिटी सदस्य गीता मंडल ने मतदान के बाद विधायकों के मतपत्र को देखा और सही पाया। हम आश्वस्त थे कि आपके नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के दोनों उम्मीद्वारों की जीत होगी।
मनोज भक्त ने कहा कि दुख की बात है कि चुनाव नतीजे इस अनुरूप नहीं थे। नतीजों के सामने आते न आते कांग्रेस के पोलिंग एजेंट के राजू समेत सभी नेताओं ने भाकपा माले और राजद पर आरोप मढ़ना शुरू कर दिया। कांग्रेस के नेताओं ने गठबंधन और हमारे वोटों का भी लिहाज नहीं किया। हमें पूरी आशंका है कि राज्यसभा चुनाव 2026 में आपके नेतृत्व और अपने उम्मीदवार के साथ कांग्रेस के विधायकों ने पहले ही धोखा देने की साजिश रची ली थी और इसके लिए उनके पास दूसरों पर आरोप मढ़ने की कहानी तैयार थी। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि इस साजिश में कांग्रेस के पोलिंग एजेंट के राजू भी शामिल हों। पूर्व कांग्रेसी एजेंट आर पी एन सिंह का इतिहास हमारे सामने है। क्या के राजू यह कहना चाहते हैं कि उन्होंने भाकपा माले और राजद के सभी विधायकों का मतपत्र देखा है? उन्हें कांग्रेस के विधायकों के मतों की सच्चाई बतानी चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि उन्होंने झारखंड के साथ यह गंदा खेल क्यों खेला। धोखा केवल गठबंधन के साथ नहीं हुआ है, बल्कि कांग्रेस ने झारखंड के साथ धोखा किया है। इसके लिए उसे कड़ा सबक मिलना चाहिए। कांग्रेस का झारखंड-विरोधी चरित्र किसी से छिपा नहीं है। मुख्यमंत्री जी, कांग्रेस उम्मीद्वार प्रणव झा जब हमलोगों से बातचीत करने हमारे पार्टी कार्यालय और बाद में हमारी राज्य कमिटी की बैठक में आए थे, उस वक्त ही हमने उनसे उन चर्चाओं के बारे में पूछा था कि कांग्रेस के विधायकों के बिकने की बात बाहर में चल रही है, इसमें क्या सच्चाई है। झा ने आश्वस्त किया था कि उनके विधायक बिकेंगे नहीं और उस वक्त एकजुट हैं. जाहिर है कि वे अपने विधायकों की स्थिति से अवगत नहीं थे।
हेमंत सोरेन जी, ज्यादा दिन नहीं हुए। आपकी सरकार को गिराने के लिए कांग्रेस के विधायक किस तरह की उछल-कुद कर रहे थे, आप भूले नहीं होंगे। 2022 जुलाई में कांग्रेसी विधायक नोटों के साथ पकड़े गये थे। मैं यहां उनके नाम दुहराउंगा नहीं। आप कांग्रेस नेताओं की आपसी सार्वजनिक छीछालेदर भरी बयानबाजियों से समझ सकते हैं कि ये खुद पद और धन के लालच में किस स्तर पर गिर सकते हैं। कांग्रेस के आरोप खुद कांग्रेस का पर्दाफाश कर रहे हैं।
हमारी पार्टी भाकपा माले जनसंघर्षों को सर्वोपरि मानती है और पद एवं धन से हमारे नेताओं को खरीदा नहीं जा सकता है। देश को सांप्रदायिक-कॉरपोरेट ताकतों की गुलामी से मुक्त करने के लिए भाजपा की संपूर्ण पराजय जरूरी है। हम अपनी लड़ाई के साथ समझौता नहीं कर सकते चाहे हमें कोई भी कुर्बानी क्यों नहीं देनी पड़े। कॉ ए के राय, कॉ गुरुदास चटर्जी, कॉ महेंद्र सिंह, कॉ धनीराम मांझी और हमारे तमाम शहीद नेता इसके उदाहरण हैं। हमने हजारों साथियों ने कुर्बानियां दी हैं. यातनाएं सही है और लड़कर झारखंड की लड़ाई को परवान पर चढ़ाया है।
मुख्यमंत्री जी, इंडिया गठबंधन के नेता के बतौर आपसे आग्रह है कि पूरे मामले की गहन छान-बीन की जाए और झारखंड को कलंकित करने की कांग्रेस की गतिविधियों के लिए उसे स्पष्ट चेतावनी दी जाए। कांग्रेस आपकी आबुआ सरकार की हिस्सा है लेकिन उसके मंत्री झारखंड में जल-जंगल-जमीन लूटनेवाले परिमल नाथवाणी जैसे कॉरपोरेट हित साधकों से हाथ मिलाने में जरा भी नहीं हिचकते। कांग्रेस की यह प्रवृति झारखंड में भाजपा विरोधी एकता को और भाजप के खिलाफ संघर्ष को कमजोर करती है।