सिविल इंजीनियर ने मुखिया बन बदल दी नक्सल प्रभावित भेलवाघाटी की तस्वीर 

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सिविल इंजीनियर ने मुखिया बन बदल दी नक्सल प्रभावित भेलवाघाटी की तस्वीर 

हाई मास्क लाइट से जगमगा रहा चौक-चौराहा, जहां अंधेरा और असुरक्षा का माहौल रहता था, वहीं अब लोग रात में भी आसानी से कर पाते आवागमन 

चौक-चौराहों पर बैठने की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जनसुविधाओं पर विशेष ध्यान : बिकास कुमार 

डीजे न्यूज, देवरी(गिरिडीह) : एक समय था जब भेलवाघाटी पंचायत का नाम आते ही लोगों के मन में नक्सल प्रभावित क्षेत्र की छवि उभरती थी। विकास की बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे इस पंचायत की पहचान आज तेजी से बदल रही है। सड़क, रोशनी, सार्वजनिक सुविधाओं और सौंदर्यीकरण के क्षेत्र में हुए कार्यों ने भेलवाघाटी को एक नई पहचान देने का काम किया है।

पंचायत के मुखिया सिविल इंजीनियर बिकास कुमार के नेतृत्व में बीते वर्षों में कई ऐसे कार्य हुए हैं, जिनका असर ग्रामीणों के दैनिक जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पंचायत के विभिन्न चौक-चौराहों पर सीमेंट की कुर्सियां लगाई गई हैं, जिससे ग्रामीणों, बुजुर्गों और राहगीरों को बैठने की सुविधा मिल रही है। यह पहल न केवल लोगों की सुविधा बढ़ा रही है, बल्कि पंचायत को एक व्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप भी प्रदान कर रही है।

रात में जगमगाता है पूरा पंचायत

भेलवाघाटी पंचायत में विकास की सबसे बड़ी पहचान इसकी रोशनी बन चुकी है। पंचायत के 16 प्रमुख चौक-चौराहों पर हाई मास्क लाइटें स्थापित की गई हैं। रात होते ही ये चौक रोशनी से जगमगा उठते हैं और दूर-दूर से देखने पर पूरा क्षेत्र किसी औद्योगिक नगर जैसा प्रतीत होता है।

इसके अलावा पंचायत में लगभग 250 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं, जिससे गांवों की गलियां और सड़कें रात में भी प्रकाशमान रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां अंधेरा और असुरक्षा का माहौल रहता था, वहीं अब लोग रात में भी आसानी से आवागमन कर पाते हैं।

विकास के साथ बदली सोच

ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत में केवल भौतिक विकास ही नहीं हुआ है, बल्कि लोगों की सोच में भी सकारात्मक बदलाव आया है। सार्वजनिक स्थलों का सौंदर्यीकरण, स्वच्छता और सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार ने गांवों को नई दिशा दी है।

मुखिया इंजीनियर बिकास कुमार का कहना है कि पंचायत का विकास केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को बेहतर जीवन-परिवेश उपलब्ध कराना भी उनकी प्राथमिकता है। इसी सोच के तहत चौक-चौराहों पर बैठने की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जनसुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से विकास की मिसाल

भेलवाघाटी कभी नक्सल प्रभाव के कारण चर्चा में रहता था, लेकिन आज यह पंचायत विकास और बदलाव की सकारात्मक कहानी लिख रही है। रोशनी से जगमगाते चौक, सोलर लाइटों से प्रकाशित गांव और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार यह दर्शाता है कि इच्छाशक्ति और सही नेतृत्व से किसी भी क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है।

पंचायत के लोग अब इस बदलाव को अपनी उपलब्धि मानते हैं और सार्वजनिक संपत्तियों की देखभाल में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विकास की यह यात्रा आने वाले दिनों में भेलवाघाटी को क्षेत्र के अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बना सकती है।

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