चार श्रम कोडों के खिलाफ राज्यव्यापी ‘मजदूर आक्रोश दिवस’ सफल
ट्रेड यूनियनों ने संघर्ष तेज करने का किया ऐलान
डीजे न्यूज, रांची: चार लेबर कोड के नियमों की अधिसूचना के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर मंगलवार को राज्यभर में ‘आक्रोश दिवस’ मनाया गया। इस दौरान विभिन्न खदानों, औद्योगिक क्षेत्रों, कार्यस्थलों तथा सार्वजनिक स्थलों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए तथा श्रमिकों ने श्रम कोडों की प्रतियां जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
रांची में शाम को आयोजित विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मजदूरों, कर्मचारियों, ठेका श्रमिकों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों तथा विभिन्न ट्रेड यूनियनों एवं महिला संगठन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा 8 मई को चारों श्रम कोडों के नियमों को अधिसूचित किए जाने के फैसले को श्रमिक विरोधी, कॉरपोरेट-परस्त और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।
संयुक्त मंच ने कहा कि हालिया विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद श्रम कोडों की अधिसूचना जारी करना यह दर्शाता है कि सरकार जनादेश का इस्तेमाल श्रमिकों के संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने के लिए कर रही है। मंच के अनुसार ये कोड न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, निश्चित कार्य घंटे तथा यूनियन बनाने के अधिकार जैसे बुनियादी श्रम अधिकारों को खत्म कर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 तथा यूएपीए जैसे दमनकारी कानूनों के साथ श्रम कोडों का इस्तेमाल श्रमिक आंदोलनों को अपराध घोषित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और नियोक्ता वर्ग गेट मीटिंग, पर्चा वितरण तथा ज्ञापन सौंपने जैसी लोकतांत्रिक गतिविधियों को भी दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
संयुक्त मंच ने स्पष्ट किया कि ट्रेड यूनियन आंदोलन इस “शोषणकारी और गुलामी थोपने वाले दस्तावेज़” को कभी स्वीकार नहीं करेगा तथा देशभर में निर्णायक प्रतिरोध और व्यापक जनसंघर्ष को आगे बढ़ाया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल श्रम अधिकारों की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।
मंच की ओर से देशभर के उत्पादक वर्गों—असंगठित एवं ठेका मजदूरों, ग्रामीण एवं खेतिहर मजदूरों तथा किसानों—के संघर्षों के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई। साथ ही, उत्तरी भारत के श्रमिक आंदोलनों तथा 15 मई को मनरेगा श्रमिकों द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को समर्थन देने की घोषणा की गई।