भाजपा के चक्रव्यूह में फंसा विपक्ष
महिला आरक्षण विधेयक
कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष को महिला विरोधी करार देने की पुरजोर कोशिश, भाजपा ने देशभर में अपने नेताओं को मोर्चे पर लगाया
दिलीप सिन्हा, राजनीतिक संवाददाता देवभूमि झारखंड न्यूज धनबाद : महिलाओं को लोकसभा एवं विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश की थी। पक्ष और विपक्ष की लंबी बहस के बाद यह विधेयक कुल 54 वोटों से गिर गया। इस विधेयक को पारित करने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत जुटानी थी जो नहीं हो सका। ऐसा नहीं है कि भाजपा नेतृत्व इस हकीकत से अनजान था कि इस विधेयक को पारित कराना मुश्किल ही नहीं असंभव है। कारण, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, झामुमो समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने इस विधेयक को समर्थन नहीं देने का ऐलान कर दिया था। इसके बावजूद भाजपा ने यह दांव खेला। कारण, बिल्कुल साफ था। भाजपा की रणनीति थी कि विधेयक के गिरने के बाद वह जनता की अदालत में जाएगी। वहां वह कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष को महिला विरोधी करार देगी। विपक्ष को सफाई देने में ही ताकत लगाना होगा कि वह महिला आरक्षण के विरोधी नहीं है बल्कि इस विधेयक की आड़ में जो परिसीमन का खेल खेला जा रहा है, उसका विरोध कर रहा है। इस विधेयक के गिरने के बाद झारखंड समेत पूरे देश में भाजपा ने जो पटकथा लिखी है, उसी के इर्द-गिर्द आज राजनीति चल रही है। बंगाल एवं तामिलनाडू विधानसभा चुनाव में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत सभी दिग्गज भाजपा नेता महिला आरक्षण विधेयक को मुद्दा बनाकर महिलाओं की सहानुभूति बटोरने में लगे हैं। वहीं कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके को सफाई देनी पड़ रही है कि वह महिला आरक्षण के विरोधी नहीं हैं।
इधर भाजपा ने अपने तमाम बड़े-बड़े नेताओं को अपने इस एजेंडे में लगा दिए हैं। सभी जगहों पर भाजपा के फायर ब्रांड नेताओं को मीडिया से बातचीत के लिए उतारा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास सोमवार को धनबाद में इस संबंध में प्रेस वार्ता करेंगे। मीडिया के माध्यम से भाजपा के ये नेता यह बताने की कोशिश करेंगे कि कांग्रेस और उसके गठबंधन के दल महिला विरोधी हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया था। गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में ही दो टूक कहा था कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है। ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण की विपक्ष की मांग का भी भाजपा के नेता यह कहकर जवाब दे रहे हैं कि जाति जनगणना की रिपोर्ट के बाद इसका प्रावधान किया जाएगा। वहीं झामुमो की स्टार लीडर और गांडेय की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन का कहना है कि प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों की महिलाओं की हिस्सेदारी क्या होगी। कल्पना का कहना है कि पक्ष और विपक्ष दोनों को पता था विधेयक का क्या होने वाला है। यह बिल 2023 में ही पारित हो चुका है। जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू करने की बात हुई थी। फिर आज अचानक क्यों। मंशा साफ है तो मौजूदा लोकसभा आैर विधानसभा में सीटों की जो स्थिति है, उसी में इसे लागू कर दें।
कुल मिलाकर आप देखें तो भाजपा के चक्रव्यूह में आज विपक्ष पूरी तरह से फंस चुका है। विशेषकर झारखंड जैसे राज्य जहां भाजपा की स्थिति कमजोर है, यह एजेंडा भाजपा को ताकत देगा।
——————-
वोटिंग के समय उपस्थित सांसदों की संख्या : 528
विधेयक के समर्थन में पड़े वोट : 208
विधेयक के विरोध में पड़े वोट : 230
पारित होने के लिए दो तिहाई बहुमत अर्थात कुल 352 वोटों की जरूरत थी
इस तरह यह विधेयक कुल 54 वोटों से यह विधेयक पारित नहीं हो सका