वैज्ञानिक सोच, अवधारणात्मक समझ और तार्किक क्षमता से अवगत हुए विद्यार्थी

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वैज्ञानिक सोच, अवधारणात्मक समझ और तार्किक क्षमता से अवगत हुए विद्यार्थी

डीजे न्यूज, धनबाद: वंचित वर्ग के छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने, अवधारणात्मक समझ बढ़ाने और तार्किक क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से आइआइटी-आइएसएम धनबाद ने शनिवार को भगीरथ ब्रह्मचारी हाई स्कूल, राजगंज (बाघमारा) में एक हैंड्स-ऑन स्टीम प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम 22 जुलाई 2024 को भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और आइआइटी-आइएसएम के बीच हुए एमओयू के तहत चल रहे सतत प्रशिक्षण अभियान का हिस्सा है, जिसके माध्यम से प्रोजेक्ट प्रभावित परिवारों (PAP) और अन्य वंचित समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक शिक्षा प्रदान की जा रही है।
स्टीम यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स का एकीकृत शिक्षण मॉडल है, जो छात्रों में समस्या समाधान, नवाचार और विश्लेषणात्मक सोच विकसित करने पर जोर देता है। आज के तेजी से बदलते तकनीकी दौर में यह शिक्षा प्रणाली छात्रों के समग्र विकास और भविष्य की बेहतर संभावनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रो. रश्मि सिंह और प्रो. नीलाद्रि दास के नेतृत्व में आयोजित इस सत्र में कक्षा 9 और 10 के करीब 200 छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विजुअल डेमोंस्ट्रेशन, लॉजिकल रीजनिंग और प्रयोग आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से छात्रों को विज्ञान के सिद्धांतों को समझाया गया। बैलून ब्लो-अप, कैंडल वाटर राइजिंग और हल्दी इंडिकेटर जैसे प्रयोगों ने छात्रों को थ्योरी को व्यवहार से जोड़ने का अवसर दिया।
प्रो. रश्मि सिंह ने कहा, “हमारा प्रयास है कि विज्ञान को हर छात्र के लिए सरल और रोचक बनाया जाए, खासकर उन छात्रों के लिए जो संसाधनों से वंचित हैं।”
प्रो. नीलाद्रि दास ने कहा, “ऐसे कार्यक्रम छात्रों में तार्किक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करते हैं, जो उन्हें आगे चलकर STEM क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगे।”
स्कूल के प्राचार्य आनंद कुमार ने कहा, “संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा दिया गया यह प्रशिक्षण हमारे छात्रों के लिए बेहद प्रेरणादायक है और इससे उनकी सीखने की क्षमता में स्पष्ट सुधार होगा।”
यह पहल संस्थान की समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आने वाले समय में भी इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए छात्रों के समग्र विकास पर जोर दिया जाएगा।

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