व्यवहार ऐसा, मानो जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि कोई फरियादी सामने बैठा हो

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व्यवहार ऐसा, मानो जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि कोई फरियादी सामने बैठा हो

 

जमुआ विधायक डॉ मंजू कुमारी को सम्मान नहीं देने का पथ निर्माण विभाग के अधिकारी पर आरोप, बाबूलाल ने मुख्यमंत्री को दी नसीहत

डीजे न्यूज, गिरिडीह : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जमुआ की भाजपा विधायक डॉ मंजू कुमारी और पथ निर्माण विभाग के एक बड़े अधिकारी का फोटो इंटरनेट मीडिया पर जारी कर उक्त अधिकारी पर विधायक की गरिमा का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया है। साथ ही इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधा है।

बाबूलाल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कोट करते हुए कहा है कि जो तस्वीर सामने आई है, वह सिर्फ एक तस्वीर नहीं…यह सत्ता पोषित घमंड और व्यवस्था की सड़ांध का जीता-जागता प्रमाण है।

एक तरफ जनता द्वारा चुनी गई माननीय विधायक और दूसरी तरफ एक विवादों में घिरे रहे अधिकारी… लेकिन व्यवहार ऐसा, मानो जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि कोई फरियादी सामने बैठा हो! क्या यही लोकतंत्र है? क्या यही सम्मान है जनता के वोट का? जब देश के प्रधानमंत्री तक आम नागरिक को अपने पास बैठाकर सम्मान देता है, तो ये राज्य के अधिकारी किस घमंड में चूर हैं? जो अधिकारी विधायक की गरिमा नहीं समझता, वो आम जनता को क्या समझेगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

पथ निर्माण विभाग पहले ही भ्रष्टाचार के दागों से सना हुआ है… और अब उसके अधिकारी जनप्रतिनिधियों को भी ‘दरबारी’ समझने लगे हैं! अहंकार इतना कि शिष्टाचार भी भूल गए? ये तो और भी शर्मनाक है कि एक महिला विधायक के साथ भी ऐसा अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र का अपमान है। हेमंत सोरेन जी ऐसे ‘कमाऊ, बेलगाम और मनबढू’ अधिकारियों को उनकी औकात याद दिलाईये। उन्हें समझाइए कि वे जनता के सेवक हैं, शासक नहीं! अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ संदेश जाएगा कि झारखंड में ऐसे विवादास्पद तमाम अधिकारी ही असली सत्ता हैं और आप या दूसरे जनप्रतिनिधि सिर्फ नाम के हैं। व्यवस्था की गरिमा बचाने के लिये अनुशासन बनाये रखना बेहद ज़रूरी है।

याद रखिए, अहंकार और भ्रष्टाचार का अंत हमेशा एक ही होता है…जेल, बेल और उम्रभर की बदनामी।

फैसला आपको करना है हेमंत जी, कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों का सम्मान बचाना है या ऐसे ही घमंडी अधिकारियों को खुली छूट देनी है? वो दिन दूर नहीं जब आप भी कभी सत्ता से बाहर होगें न तो ऐसे ही अधिकारी आपको भी औकात बताने में तनिक भी परहेज नहीं करेंगे। यह बात याद रखनी चाहिए आपको।

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