



भोक्ता पर्व में झलकी अटूट आस्था, शिवभक्ति में डूबे श्रद्धालु
किल लगाकर झूलते दिखे व्रती, महादेव मंडा में गूंजा श्रद्धा का स्वर
डीजे न्यूज, पीरटांड़ (गिरिडीह) : प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों भोक्ता पर्व की धूम मची हुई है। चैत्र एवं वैशाख माह में मनाया जाने वाला यह पारंपरिक पर्व मधुपुर, कुड़को और पालगंज गांवों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। गुरुवार को मधुपुर गांव में भोक्ता पर्व विधिवत संपन्न हुआ, जबकि कुड़को में यह पर्व शुक्रवार को आयोजित होगा।

जानकारी के अनुसार, यह पर्व क्षेत्र के शिव मंदिरों में परंपरागत रूप से मनाया जाता है, जिन्हें स्थानीय स्तर पर “महादेव मंडा” कहा जाता है। भोक्ता पर्व में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए व्रत रखते हैं और मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर वे इस पर्व में विशेष अनुष्ठान कर भगवान शिव के प्रति आभार प्रकट करते हैं।
मधुपुर गांव में इस वर्ष 36 श्रद्धालुओं ने व्रत रखा था, जिनका पर्व गुरुवार को संपन्न हुआ। वहीं कुड़को गांव में 385 श्रद्धालुओं ने व्रत रखा है। व्रती बुधवार से ही नियम-धर्म का पालन करते हुए मंदिर में प्रवेश कर चुके हैं। परंपरा के अनुसार, वे गुरुवार रात से पीठ में किल (हुक) लगाकर लकड़ी के झूले में झूलकर अपनी आस्था का प्रदर्शन करेंगे।
यह पर्व क्षेत्र में गहरी आस्था का प्रतीक माना जाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत भोक्ता पर्व के माध्यम से अवश्य पूर्ण होती है। व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए किल लगाकर झूलते हैं, जिसे एक प्रकार की तपस्या माना जाता है।

मौके पर पूरे आयोजन को सफल बनाने में प्रदीप बर्मा, महेंद्र महतो, भगत राम महतो, भगवान दास, राम गुप्ता, रामू सिंह आदि सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
भोक्ता पर्व मुख्य रूप से भगवान शिव की भक्ति और आस्था का प्रतीक है, जो झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में सदियों से परंपरागत रूप से मनाया जाता रहा है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का भी सशक्त माध्यम है।


