बीसीसीएल में भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता मजदूर संघ का हल्ला बोल प्रबंधन ने घूस वसूली पद्धति को दिया संस्थागत रूप : अभिषेक सिंह रणधीर वर्मा चौक पर विशाल धरना देकर बच्चा सिंह गुट ने दिखाई ताकत

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बीसीसीएल में भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता मजदूर संघ का हल्ला बोल

प्रबंधन ने घूस वसूली पद्धति को दिया संस्थागत रूप : अभिषेक सिंह

रणधीर वर्मा चौक पर विशाल धरना देकर बच्चा सिंह गुट ने दिखाई ताकत
डीजे न्यूज, धनबाद : भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) प्रबंधन द्वारा मृत श्रमिकों के आश्रितों के नियोजन में की जा रही धांधली, भ्रष्टाचार और लेटलतीफी के विरोध में गुरुवार को रणधीर वर्मा चौक पर जनता मजदूर संघ(बच्चा सिंह) के महामंत्री अभिषेक सिंह उर्फ गुड्डू सिंह के नेतृत्व में विशाल धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रमिक और प्रभावित परिवारों ने प्रबंधन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ गर्जना की।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए महामंत्री अभिषेक सिंह ने कहा कि यह धरना नियोजन में देरी और आउटसोर्सिंग में बंदरबांट के खिलाफ है। अभिषेक सिंह ने प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ कोल इंडिया के नियमों (168वीं सीएमडी मीटिंग) के अनुसार आश्रितों को 86 दिनों में नौकरी मिलनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर बीसीसीएल के अधिकारी फाइलों को वर्षों तक दबाकर बैठे हैं। प्रबंधन ने बीसीपी (Bribe Collection Procedure)यानी ‘घूस वसूली पद्धति’ को संस्थागत रूप दे दिया है। जब तक गरीब आश्रित मोटी रकम नहीं चढ़ाते, उनकी फाइलों पर बेमतलब की ‘क्वेरी’ लगाकर उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है।

आउटसोर्सिंग घोटाले का खुलासा

अभिषेक सिंह ने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जहाँ गरीब आश्रितों को हक देने में नियम कानून दिखाए जाते हैं, वहीं बीसीसीएल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग संवेदकों की गहरी मिलीभगत चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में बिना वास्तविक कार्य किए या नियमाविरुद्ध तरीके से आउटसोर्सिंग कंपनियों को करोड़ों का भुगतान किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर सार्वजनिक धन की लूट है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच अनिवार्य है।

आंकड़ों में भ्रष्टाचार का खेल

इस मौके पर संघ के सचिव सुभाष कुमार सिंह ने प्रेस को बताया कि
वर्तमान में 1200 से अधिक आश्रितों के नियोजन आवेदन लंबित हैं।
निदेशक (मानव संसाधन) के स्तर पर 500 से अधिक फाइलें पिछले छह महीनों से लंबित हैं।
प्रभावितों में अधिकांश दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के बेबस परिवार हैं।

संघ की मुख्य मांगें

त्वरित नियोजन: सभी 1200 लंबित फाइलों का निष्पादन कर नए SOP के तहत 86 दिनों के भीतर नियोजन सुनिश्चित हो।

भ्रष्टाचार पर रोक : घूसखोरी में लिप्त अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

आउटसोर्सिंग की जांच : आउटसोर्सिंग संवेदकों को किए जा रहे अवैध और नियमविरुद्ध भुगतानों पर तत्काल रोक लगे और इसकी निष्पक्ष जांच हो।

चेतावनी :
धरना प्रदर्शन में शामिल पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आज का यह एकदिवसीय धरना प्रबंधन के लिए अंतिम चेतावनी है। यदि समय रहते इन मांगों पर लिखित ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो संघ पूरे कोयलांचल में चक्का जाम करने और अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
इस एकदिवसीय आंदोलन को सफल बनाने के लिए संघ के पदाधिकारी में सुभाष सिंह, जटा शंकर सिंह, मुन्ना सिंह, मृणाल कांत सिंह, सुबोध सिंह, रामकृष्ण पाठक, उमाशंकर शाही, विनोद सिंह, बबलू सिंह, निखलेश सिंह, अभिषेक सिंह,अक्षय कुमार यादव, अजीत सिंह, बेदप्रकाश ओझा, ज्ञानी जैल सिंह, शंकर बेलदार, कुंवर सिंह, सुधीर, जीपी सिंह, अमरजीत यादव, लव प्रताप सिंह, अनवत हुसॆन, फारुख अंसारी, रजनीकांत मिश्रा, बंबेश सिंह, राजीव सिंह, धीरेन्द्र सिंह, राकेश सिन्हा, अनिमेष सिंह, पार्षद चंदन महतो सहित बड़ी संख्या में श्रमिक और उनके परिजन धरना स्थल पर उपस्थित रहे।

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