77वें वन महोत्सव के तहत टुंडी में ‘एक पेड़ माँ के नाम 3.0’ कार्यक्रम आयोजित
डीजे न्यूज, धनबाद: झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (धनबाद वन प्रमंडल) के तत्वावधान में शुक्रवार को टुंडी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत लोधारिया में 77वें वन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष वन महोत्सव का मुख्य विषय (थीम) “एक पेड़ माँ के नाम 3.0” रखा गया है, जिसके तहत पर्यावरण संरक्षण एवं व्यापक वृक्षारोपण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि मथुरा प्रसाद महतो (विधायक, टुंडी विधानसभा), उपायुक्त आदित्य रंजन, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, डीएफओ विकास पालीवाल, उप विकास आयुक्त सन्नी राज द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं पौधरोपण करके किया गया।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि विधायक मथुरा ने कहा कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण अति आवश्यक है और अपनी माँ के सम्मान में पौधा लगाना अत्यंत पवित्र कार्य है। इस कार्यक्रम के दौरान एक साथ लगभग 300 स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने मिलकर पौधारोपण किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि पौधा लगाना केवल किसी एक दिन या महोत्सव तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे हमारी दैनिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने सफल आयोजन के लिए वन विभाग एवं उसकी पूरी टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि झारखंड प्राकृतिक रूप से समृद्ध राज्य है। पर्याप्त वर्षा का लाभ उठाकर अधिक से अधिक पौधारोपण करना समय की आवश्यकता है।
उपायुक्त ने कहा कि चालू मानसून सत्र में जिला प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, अस्पतालों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 1 से 2 लाख पौधे लगाए एवं वितरित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अधिकतर फलदार पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि लोग पौधों के संरक्षण के लिए भी प्रेरित हों।
उन्होंने कहा कि टुंडी की हरियाली पूरे धनबाद जिले के लिए प्रेरणास्रोत है। झरिया एवं पुटकी जैसे खनन प्रभावित क्षेत्रों को भी इसी प्रकार हरा-भरा बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा कार्य किया जाएगा। माइनिंग एडवाइजरी कमेटी के माध्यम से बंद पड़ी खदानों का पुनरुद्धार कर उनमें मिट्टी भरने एवं पौधारोपण की योजना पर कार्य किया जाएगा।
उपायुक्त ने ‘वन रक्षाबंधन’ एवं ‘वन देवी’ जैसी पारंपरिक अवधारणाओं की सराहना करते हुए कहा कि जंगलों के कुछ हिस्सों को जैव विविधता संरक्षण के लिए पूर्णतः सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि सूक्ष्म जीवों एवं वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रह सके।
मानव-वन्यजीव संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हाथी अपने पारंपरिक मार्गों पर ही चलते हैं। वास्तव में मनुष्य ही उनके प्राकृतिक आवास एवं कॉरिडोर में अतिक्रमण कर रहा है। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रहना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि नई पीढ़ी ही पर्यावरण की वास्तविक संरक्षक है। प्रत्येक व्यक्ति यदि पेड़ों के महत्व को समझे तो उसे अपने जीवन में कम से कम 20 से 30 पौधे अवश्य लगाने चाहिए।
अंत में उपायुक्त ने वन प्रमंडल पदाधिकारी एवं वन विभाग की पूरी टीम की सराहना करते हुए निर्देश दिया कि इस मानसून सत्र में 3 से 4 और बड़े जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ सकें।