यूएनआई मसले पर पत्रकार संगठनों ने आपात बैठक बुलाई
डीजे न्यूज, धनबाद: देश के जुझारू पत्रकार संगठनों के परिसंघ ने समाचार एजेंसी यूएनआई मसले पर इस महीने के तीसरे सप्ताह में आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में कर्मचारियों एवं पूर्व कर्मचारियों के बकाये राशि का पूर्ण भुगतान, पीएफ के मामले, कंपनी को कथित हेराफेरी के जरिए कभी मालिकाना में शामिल रहे स्टेट्समैन को ओने पौने में हस्तांतरित करने, यूएनआई में निवेश किए गए राशि की वैधता, हाल में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर खाली कराए गए सरकारी जमीन पर यूएनआई के मौजूदा प्रबंधन द्वारा किए गए अवैध निर्माण आदि मुद्दों पर गहन चर्चा होगी एवं आंदोलन की अग्रिम रूप रेखा तैयार की जाएगी।
यह जानकारी सार्क जर्नलिस्ट फोरम के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील भारती, पत्रकार संगठनों के परिसंघ के अध्यक्ष डॉ.सुरेंद्र शर्मा एवं सेव यूएनआई मूवमेंट के कानूनी प्रकोष्ठ के वरिष्ठ सदस्य एवं दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अरविंद कुमार चौधरी ने गुरुवार को दी।
सुशील भारती ने कहा कि संगठन इन संपूर्ण गतिविधियों पर अरसे से नजर रख रहा था। उम्मीद की जा रही थी कि सभी चीजें संस्थान एवं कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों के हितों में कानूनी दायरे में पारदर्शी तरीके से होगी, लेकिन चंद चाटुकार कर्मचारियों की मिली भगत से ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। पैसा किस श्रोत से आया ? यह अहम है। इसलिए इन तमाम स्थितियों की सीबीआई से जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह से इसकी तुरंत जाँच की मांग की जाएगी। आवश्यकता हुई तो आंदोलन भी शुरू किया जाएगा।
डॉ.शर्मा ने कहा कि यूएनआई को नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक ऐसी दम तोड़ती कंपनी के हवाले किया गया है, जो कभी कंपनी के शेयर होल्डरों में शामिल रहा है। उसने शेयर होल्डर की हैसियत से कभी यूएनआई की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया, लेकिन हालात बदतर होने पर बेशकीमती भूखण्डों एवं अन्य संपत्तियों की लालच में रिसीवर के जरिए यूएनआई का सर्वेसर्वा बन गया।
अधिवक्ता चौधरी ने कहा कि मौजूदा प्रबंधन के खिलाफ हम सभी कानूनी पहलुओं पर विचार कर रहे है। बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई है। इन तमाम स्थितियों की सीबीआई से जांच करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश की जनता की वजह से हजारों करोड़ रुपये की दिल्ली में लूटियन जोन स्थित 9 रफ़ी मार्ग की सरकारी जमीन को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर इन माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जा सका है। यह ऐतिहासिक कदम है।