वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पर विद्या भारती का बड़ा आयोजन : शुक्रवार को एक साथ होगा सम्पूर्ण वन्दे मातरम् का सामूहिक गायन, बनेगा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
गिरिडीह में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बरगंडा में होगा मुख्य आयोजन, सुश्मिता गुड़िया समेत कई पत्रकारों को विद्यालय परिवार ने किया सम्मानित
डीजे न्यूज, गिरिडीह : महान साहित्यकार बंकिमचन्द्र चटोपाध्याय द्वारा 150 वर्ष पूर्व रचित ‘वन्देमातरम्’ की सार्द्धशताब्दी वर्ष के अवसर पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान ने पूरे देश में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विद्या भारती के महामंत्री देशराज शर्मा ने सभी क्षेत्रीय/प्रान्तीय मंत्री, संगठनमंत्री एवं सह-संगठनमंत्रियों को निर्देश जारी किए हैं।
गिरिडीह में इस मौके पर शुक्रवार की सुबह सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बरगंडा में मुख्य आयोजन होगा। विद्यालय परिवार की ओर से इसके पूर्व देवभूमि झारखंड न्यूज की गिरिडीह प्रभारी सुश्मिता गुड़िया समेत कई पत्रकारों को सम्मानित किया गया।
विद्या भारती के अनुसार, वन्देमातरम् के 150 वर्ष भारत की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संघर्ष, सांस्कृतिक गौरव और मातृभूमि के प्रति अटूट श्रद्धा की यात्रा का प्रतीक है। यह ऐतिहासिक उत्सव अपने विद्यालयों में मनाया जाए, इस दृष्टि से सम्पूर्ण वन्देमातरम् गायन कार्यक्रम का आयोजन तय हुआ है।
मुख्य कार्यक्रम: सम्पूर्ण वन्देमातरम् सामूहिक गायन
कार्यक्रम का नाम : सम्पूर्ण वन्देमातरम् सामूहिक गायन
तिथि : पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती, 25 सितम्बर प्रातः 11:00 बजे
स्थान : विद्यालय परिसर, पोषित ग्राम व वार्ड, गाँव, नगर का सार्वजनिक स्थल जैसे मैदान, शासकीय अधिकारी कार्यालय, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, जिलाधीश कार्यालय, पूर्व आचार्य, पूर्व छात्रों के संस्थान जहाँ वे कार्यरत हैं तथा सम्पर्कित विद्यालय।
कार्यक्रम के उद्देश्य
विद्यार्थियों एवं सभी हितधारकों के हृदय में राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और मातृभूमि के प्रति समर्पण भावना जागृत करना।
वर्तमान एवं भावी पीढ़ी के मन में वन्देमातरम् के प्रति गौरव का भाव जागरण करना।
व्यापक स्तर पर कार्यक्रम सम्पन्न करके गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए प्रयास करना।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए निर्देश जारी
गिनीज रिकॉर्ड के लिए विद्या भारती ने विशेष निर्देश दिए हैं
एक तिथि, एक समय, एक स्वर में सम्पूर्ण वन्देमातरम् का सामूहिक गायन।
अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करना।
पंक्तिबद्ध या मण्डलाकार स्थानानुसार आयोजन में अनुशासन व सम्मान बनाए रखना।
कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से करें। उपस्थिति का दस्तावेजीकरण आवश्यक होने पर ड्रोन या ऊंचे स्थान से सामूहिक दृश्य का चित्र लेना।
चित्र में प्रतिभागी संख्या, विद्यालय का नाम, स्थान एवं समय स्पष्ट दिखाई देना चाहिए।
प्रतिभागियों की उपस्थिति सूची तैयार करें जो प्रधानाचार्य द्वारा प्रमाणित हो। इस दस्तावेज को सुरक्षित संभाल कर रखें।
कार्यक्रम के बाद फोटो, वीडियो, उपस्थिति संख्या, कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण निर्धारित प्रारूप में सम्बन्धित समन्वय केन्द्र को भेजें।
प्रतिभागी : छात्र भैया-बहिन, आचार्य, सेवा कर्मचारी, प्रबन्ध समिति, अभिभावक, पूर्व छात्र, पूर्व आचार्य एवं अन्य नागरिक।
कार्यक्रम की रूपरेखा : कार्यक्रम स्थल पर भारत माता का माल्यायुक्त चित्र/दीप प्रज्ज्वलन तथा पुष्पार्चन की व्यवस्था होगी। यदि राष्ट्रीय ध्वजारोहण की सुविधा हो तो ध्वजारोहण के तुरंत बाद राष्ट्रगान (जन-गण-मन) का सामूहिक गायन किया जाएगा। वन्देमातरम् के इतिहास, महत्ता तथा सार्द्धशताब्दी वर्ष के सम्बन्ध में विषय प्रस्तुति छात्र-छात्राओं में से कोई एक, आमंत्रित मुख्य अतिथि तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य या कोई वरिष्ठ आचार्य रखेंगे। तीनों व्याख्यान के पश्चात् पूर्ण वन्देमातरम् का सामूहिक सस्वर-लयबद्ध गायन किया जाएगा।
पूर्व अभ्यास का शेड्यूल
अप्रैल-मई में छात्रों, आचार्यों, अभिभावकों को शुद्ध उच्चारण के साथ कण्ठस्थ अभ्यास करवाया जाएगा। जुलाई-अगस्त में कक्षाशः प्रतियोगिताएँ और आचार्य-अभिभावक मिलन बैठकें होंगी। सितंबर में सामूहिक गान का पूर्व अभ्यास कर व्यवस्थाओं के साथ कार्यक्रम का आयोजन होगा।
प्रबुद्धजन गोष्ठियों का आयोजन
26 सितम्बर से 7 नवम्बर तक डेढ़ से दो घंटे की प्रबुद्धजन गोष्ठियाँ भी आयोजित होंगी। इसका स्वरूप दीप प्रज्ज्वलन एवं वन्दना, अतिथि परिचय, प्रस्तावना, एकलगीत, मुख्यवक्ता द्वारा उद्बोधन, अध्यक्षीय उद्बोधन, आभार ज्ञापन और अंत में पूर्ण वन्देमातरम् के सामूहिक गायन के रूप में होगा।