टुंडी के अभिनीत अक्षत ने सीबीएसई रीजनल साइंस एग्जीबिशन में लहराया परचम 

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टुंडी के अभिनीत अक्षत ने सीबीएसई रीजनल साइंस एग्जीबिशन में लहराया परचम 

अब राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित साइंस एग्जीबिशन में करेंगे प्रदर्शन 

सरला बिड़ला पब्लिक स्कूल में सीबीएसई रीजनल साइंस एग्जीबिशन 2025-26 का भव्य समापन, ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत’ थीम पर नवाचार की झलक

डीजे न्यूज, रांची : सरला बिड़ला पब्लिक स्कूल रांची में आयोजित दो दिवसीय सीबीएसई रीजनल साइंस एग्जीबिशन 2025-26 में धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड के लाला टोला गांव निवासी एवं पीएचईडी के वाश कोर्डिनेटर प्रेम कुमार सिन्हा के पुत्र अभिनीत अक्षत ने परचम लहराया है। इस एग्जीबिशन में वह राज्यभर में चयनित हुआ है। अब वह सीबीएसई के राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले एग्जीबिशन में प्रदर्शन करेगा। अभिनीत अक्षत ने टुंडी व धनबाद के साथ-साथ पूरे राज्य का मान बढ़ाया है। दो दिवसीय यह प्रदर्शनी बुधवार तक चला जिसमें इंटरैक्टिव सत्र, लाइव डेमो और प्रोजेक्ट मूल्यांकन शामिल था।

अभिनीत अक्षत दिल्ली पब्लिक स्कूल धनबाद का ग्यारहवीं का छात्र है। अभिनीत अक्षत ने एग्जीबिशन में वाटर कन्जर्वेशन डिवाइस बनाकर पेश किया था। उसने बताया कि बाथरूम में व किचेन में हम पानी की बर्बादी करते हैं। उसने जो डिवाइस बनाया है, वह औसत से अधिक पानी खर्च करने पर हमें अलर्ट कर देगा। इसके लिए उसके डिवाइस से अलार्म बजने लगेगा। जजों ने उसे कई सवाल किए और जवाब पाकर सभी संतुष्ट हुए। इसके बाद उसे राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित कर लिया गया। अभिनीत अक्षत ने बताया कि उसके मेंटर डीपीएस धनबाद की केमिस्ट्री टीचर बंदना दत्ता हैं।

 इसके पूर्व एग्जीबिशन का शुभारंभ मंगलवार को बड़े उत्साह और गरिमामय माहौल में किया गया। दो दिवसीय यह प्रदर्शनी ‘STEM for Viksit and Atmanirbhar Bharat’ थीम पर आधारित था जिसमें विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की अवधारणा को प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर सीबीएसई रांची क्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारी रामवीर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में सरला बिड़ला विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति प्रो. (डॉ.) जेगनाथन चोकलिंगम, निदेशक जनरल प्रो. (डॉ.) गोपाल पाठक, तथा रजिस्ट्रार प्रो. एस. बी. डंडिन विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा सीबीएसई द्वारा नियुक्त छह जज और कई विद्यालयों के प्राचार्य भी उपस्थित रहे।

प्रदर्शनी का शुभारंभ सरस्वती वंदना और स्वागत गीत से हुआ, जिसके बाद विद्यालय के विद्यार्थियों ने “उन्नति की उड़ान” नामक रंगारंग नृत्य-प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति ने भारत के विकसित और आत्मनिर्भर भारत 2047 के विज़न को कला के माध्यम से साकार रूप में प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी में 45 से अधिक विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया और अपने विज्ञान मॉडल्स के माध्यम से सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, नवीकरणीय ऊर्जा, वेस्ट मैनेजमेंट, जल संरक्षण, वैकल्पिक प्लास्टिक, रोबोटिक्स और तकनीकी नवाचार जैसे विषयों पर अपने प्रोजेक्ट्स प्रदर्शित किए।

मुख्य अतिथि रामवीर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी में STEM शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि, स्वास्थ्य और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में नए आयाम खोलती है। उन्होंने कहा कि सरला बिड़ला पब्लिक स्कूल द्वारा इस तरह का आयोजन विद्यार्थियों में जिज्ञासा, प्रयोगशीलता और नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करता है।

प्रो. (डॉ.) गोपाल पाठक ने कहा कि भारत का वैज्ञानिक इतिहास गौरवशाली रहा है और आज के युवा वैज्ञानिकों पर यह जिम्मेदारी है कि वे इस परंपरा को और आगे बढ़ाएँ। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी ही “विकसित भारत” के निर्माण की कुंजी है। विद्यालय की प्राचार्या सुश्री मनीषा शर्मा ने कहा कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और उन्हें अनुभवाधारित शिक्षा (Experiential Learning) की दिशा में प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि STEM केवल विषयों का समूह नहीं, बल्कि सोचने और समस्या समाधान का एक तरीका है।

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